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मेडिकल ऑक्सीजन कैसे बनाई जाती है? | Production of Medical Oxygen in Hindi

Production of Medical Oxygen in Hindi– मेडिकल ऑक्सिजन की बनाने की प्रक्रिया क्या है? आखिर किस प्रकार मेडिकल ऑक्सिजन गैस फैक्ट्री में बनाई जाती है? और इसके अलावा इसके चिकित्सा क्षेत्र में क्या आवश्यकतायें है इन बिंदुओं पर भी हम इस आर्टिकल में बात करेंगे।

Air composition diagram, vayu me gaison ka sanghtan

मेडिकल ऑक्सिजन गैस बनाने के लिए हम कच्चे माल के रूप में वातावरण की वायु का प्रयोग करते हैं। क्योंकि वातावरण या वायुमंडलीय वायु में ऑक्सिजन की पर्याप्त मात्रा उपस्थित होती है। वातावरण की वायु में ऑक्सीजन की प्रतिशतता 20.9% है। जोकि पर्याप्त मात्रा है। इससे हम आसानी से कच्चे माल के रूप में प्रयोग ला सकते है। किसी भी मेडिकल ऑक्सीजन बनाने वाले प्लांट में Oxygen Production क्रायोजेनिक डिस्टिलेशन प्रोसेस के द्वारा किया जाता है।

मेडिकल ऑक्सीजन की आवश्यकता क्यों है?

इस समय कोरोना वायरस का द्वितीय चरण चल रहा है, इससे भारत की दशा बहुत दयनीय है। कोरोना वायरस व्यक्ति के फेफड़ो को प्रभावित करता है। चलिए जान लेते हैं कि कोरोना वायरस किस प्रकार व्यक्ति में श्वसन क्रिया को कैसे प्रभावित करता है। सामान्य मनुष्य सीधे ही वायुमंडल से साँस लेता है और ऑक्सीजन उसके फेफड़ो द्वारा सोख ली जाती है और कॉर्बन डाई ऑक्साइड को मुक्त कर दिया जाता है।

जबकि कोरोना वायरस से पीड़ित व्यक्ति के फेफड़ों की श्वसन क्षमता प्रभावित होने से व्यक्ति सीधे वायुमंडल से साँस लेने में असमर्थ हो जाता है। और उसका दम घुटने लगता है। इसके पश्चात वह मृत्यु की दुर्दशा का शिकार भी हो जाता है। इसलिए कोरोना वायरस से पीड़ित व्यक्ति को वायुमंडलीय वायु से साँस लेने में असमर्थता को देखकर उसे सीधे ही ऑक्सीजन गैस दी जाती है। जिससे व्यक्ति साँस लेने में समर्थ हो जाता है, और साथ ही उसके अन्य चिकित्सकीय उपचार किये जाते हैं। जिससे पीड़ित व्यक्ति के स्वस्थ होने में कम समय लगता है।

अन्य श्वसन संबंधी समस्याओं में व्यक्ति को मेडिकल ऑक्सीजन दी जाती है, जिससे व्यक्ति कम समय मे पूर्णतः स्वस्थ हो सके। चलिए अब हम जान लेते हैं कि फैक्ट्री या प्लांट में मेडिकल ऑक्सीजन कैसे बनाई जाती है?

मेडिकल ऑक्सीजन की निर्माण प्रक्रिया ( Production of Medical Oxygen in Hindi with process)

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किसी भी फैक्ट्री या प्लांट में मेडिकल ऑक्सीजन क्रायोजेनिक डिस्टिलेशन प्रोसेस के द्वारा बनाई जाती है। जिससे हमें शुद्ध ऑक्सीजन गैस प्राप्त हो जाती है। इस प्रक्रिया में निम्नलिखित चरणों के द्वारा मेडिकल ऑक्सीजन गैस बनती है।

1. Air Input– सबसे पहले वायुमण्डल से वायु ली जाती है। जो अशुद्ध रूप में होती है। इसमें सभी गैसें और धूलकण इत्यादि भी उपस्थित होते हैं। यह वायु Air Compressor में जाती  है।

2. Air Compressor– इसका काम हवा को संकुचित (Compress) करना होता है। और इसके पश्चात Compressed Air को Refrigeration Dryer में भेज दिया जाता है।

3. Refrigeration Dryer Tank– जब वायुमंडलीय वायु को संकुचित किया जाता है तो उसका तापमान (Temperature) अधिक हो जाता है, साथ ही उसमे नमी भी होती है। इसलिए इस चैम्बर का मुख्य कार्य हवा के तापमान को कम करना और उसमें उपस्थित नमी को खत्म करना होता है।

4. Filter Package– इसके पश्चात शुष्क वायु के विभिन्न फ़िल्टर पैकेज (कई फिल्टरों का समूह) से गुजारा जाता है, जिससे कि उस वायु में उपस्थित अन्य अशुद्धियों को भी दूर किया जा सके।
5. Coal Tower– वायु में पेट्रोलियम अशुद्धियों को दूर करने के लिए कोल टावर (Coal Tower) से भी गुजारा जाता है।

6. PSA Generator– यह इस संयंत्र का मुख्य भाग होता है। इसमें ही वायु का पृथक्करण (Distribution) होता है। वायु में उपस्थित अन्य गैसे जैसे- नाइट्रोजन, कॉर्बन-डाई-ऑक्साइड, ऑर्गन व अन्य गैसे ऑक्सीजन से अलग की जाती है। तथा ऑक्सीजन गैस को आगे भेज दिया जाता है।

7. Oxygen Storage– शेष ऑक्सीजन गैस इस चैंबर में एकत्रित (Store) की जाती है।

8. Sterlite Bacteria Filter– ऑक्सीजन गैस में उपस्थित बैक्टिरियल अशुद्धियों को दूर करने के लिए Sterlite Bacteria Filter से गुजारा जाता है।

9. Booster Pump– इसके पश्चात हमें शुद्ध मेडिकल ऑक्सीजन गैस प्राप्त हो जाती है। जिसे हम सिलिंडर में आसानी से नही भर सकते हैं क्योंकि बिना इस युक्ति के प्रयोग के बिना सिलिंडर में बहुत ही कम ऑक्सीजन गैस भर पाएंगे। इसलिए बूस्टर पम्प की सहायता से हम गैस को ऑक्सीजन सिलिंडर में भरने का काम करते हैं।

10. Oxygen Sylinder– हमें फैक्ट्री या प्लांट से ऑक्सीजन आवश्यक स्थान पर ले जाने के लिए ऑक्सीजन सिलिंडर की आवश्यकता होती है। क्योंकि हम इतने बड़े स्तर पर पाइप्स का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं।

इस प्रकार मेडिकल ऑक्सीजन गैस कंपनी/फैक्ट्री/प्लांट में बनाई जाती है। इसके पश्चात इसे विभिन्न स्थानों पर वितरित किया जाता है।

Final Words – मुझे आशा है कि आपके मन मे मेडिकल ऑक्सीजन को लेकर जितने भी सवाल थे, सब स्पष्ट हो चुके हैं। अगर आपको ये आर्टिकल पसन्द आया है तो आप इसे अपने दोस्तों के साथ व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर करें।

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