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28 April, 2020

पर्यावरण प्रदूषण पर निबन्ध | Essay on Environmental Pollution in Hindi

Paryavaran Pradushan par nibandh in Hindi- यह एक समस्या प्रधान विषय है जिस परहमे विभिन्न परीक्षाओं जैसे प्रादेशिक बोर्ड परीक्षाओं मे पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध लिखने को कहा जाता है। इस लेख के सहायता से आप आसानी से पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध पढ़ सकते हैं। और अपने परीक्षाओं मे बेहतर निबंध लिख सकते हैं। 

पर्यावरण प्रदूषण पर निबन्ध |  Paryavaran Pradushan par Nibandh

paryavaran pradushan par nibandh in Hindi mein

पर्यावरण और प्रदूषण
बढ़ता प्रदूषण और उसके कारण
धरती की रक्षा पर्यावरण सुरक्षा
पर्यावरण संरक्षण का महत्व
असंतुलित पर्यावरण प्राकृतिक आपदाओं का कारण
विश्व परिदृश्य में पर्यावरण प्रदूषण


प्रस्तावना- जो हमें चारों ओर से परिवर्तक किए हुए है। वहीं हमारा पर्यावरण है इस पर्यावरण के प्रति जागरुकता आज की प्रमुख आवश्यकता है। क्योंकि यह प्रदूषित हो रहा है। प्रदूषण की समस्या प्राचीन एवं मध्यकालीन भारत के लिए कन्या थी। यह वर्तमान युग में हुई और उद्योगी प्रगति एवं शस्त्रास्त्रों के निर्माण के फलस्वरुप उत्पन्न हुई है। आज इसने इतना विकराल रुप धारण कर लिया है कि इससे मानवता के विनाश का संकट उत्पन्न हो गया है। मानव जीवन मुख्यता स्वच्छ वायु और जल पर निर्भर है। किंतु यदि यह दोनों ही चीजें दूषित हो जाएं तो मानव के अस्तित्व को ही भय पैदा होना स्वाभाविक है। अतः इस भयंकर समस्या के कारण एवं उनके निराकरण के उपायों पर विचार करना मानवमात्र के हित में है। ध्वनि प्रदूषण पर अपने विचार व्यक्त करते हुए नोबेल पुरस्कार विजेता रॉबर्ट कोच ने कहा था "एक दिन ऐसा आएगा जब मनुष्य को स्वास्थ्य के सबसे बड़े शत्रु के रूप में निर्दयी शोर से संघर्ष करना पड़ेगा" लगता है कि वह दुखद दिन अब आ गया है।

प्रदूषण का अर्थ-स्वच्छ वातावरण में ही जीवन का विकास संभव है। पर्यावरण का निर्माण प्रकृति के द्वारा किया गया है, प्रकृति द्वारा प्रदत्त पर्यावरण जीवधारियों के अनुकूल होता है। जब इस पर्यावरण में इन तत्वों का अनुपात इस रुप में बदलने लगता है, जिसका जीवधारियों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पढ़ने की संभावना होती है। तब कहा जाता है कि पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। यह प्रदूषित वातावरण जीवधारियों के लिए अनेक प्रकार से हानिकारक होता है जनसंख्या की असाधारण वृद्धि एवं औद्योगिक प्रगति ने प्रदूषण की समस्या को जन्म दिया है। और आज इसने इतना विकराल रुप धारण कर लिया है कि इससे मानवता के विनाश का संकट उत्पन्न हो गया है। औद्योगिक तथा रासायनिक कूड़े कचरे के ढेर से पृथ्वी, हवा तथा पानी प्रदूषित हो रहे हैं।

प्रदूषण के प्रकार- आज के वातावरण में प्रदूषण निम्नलिखित रूपों में दिखाई पड़ता है।

1. वायु प्रदूषण- वायु जीवन का अनिवार्य स्रोत है। प्रत्येक प्राणी को स्वस्थ रुप से जीने के लिए शुद्ध वायु की आवश्यकता होती है। जिस कारण वायुमंडल में इसका विशेष अनुपात होना आवश्यक है। जीवधारी सांस द्वारा ऑक्सीजन ग्रहण करता है, और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ता है। पेड़-पौधे कार्बन डाइऑक्साइड लेते हैं, और हमें ऑक्सीजन प्रदान करते हैं। इससे वायुमंडल में शुद्धता बनी रहती हैं। परंतु मनुष्य की अज्ञानता और स्वार्थी प्रवृत्ति के कारण आज वृक्षों का अत्यधिक काटा जा रहा है। घने जंगल से ढके पहाड़ आज नंगे दिखाई पड़ते हैं। इससे ऑक्सीजन का संतुलन बिगड़ रहा है। और वायु अनेक हानिकारक गैसों से प्रदूषित हो गयी है। इसके अलावा कोयला, तेल, धातुकणों तथा कारखानों की चिमनीयों के धुएं से हवा में अनेक हानिकारक गैसें भर गई हैं। जो प्राचीन इमारतों, वस्त्रों, धातु तथा मनुष्यों के फेफड़े के लिए अत्यंत घातक हैं। देश की राजधानी दिल्ली में गाड़ियों और औद्योगिक संयन्त्रों से निकलने वाले धुँए से आंखें ही जलने लगती है। साथ ही फेफड़े भी कालिख़ की खतरनाक परत से ढक जाते हैं।

2. जल प्रदूषण- जीवन के अनिवार्य स्रोत के रूप में वायु के बाद प्रथम आवश्यकता जल की ही होती है। जल को जीवन कहा जाता है। जल का शुद्ध होना स्वस्थ जीवन के लिए बहुत आवश्यक है। देश के प्रमुख नगर के जल का स्त्रोत हमारी सदानीरा नदियां हैं। फिर भी हम देखते हैं कि बड़े बड़े नगरों के गंदे नाले तथा सीवर को नदियों से जोड़ दिया जाता है। विभिन्न औद्योगिक व घरेलू स्रोत से नदिया व अन्य जल स्रोत में दिनों दिन प्रदूषण पनपता जा रहा है। तालाब, पोखरों, नदियों में जानवरों का नहलाना, मनुष्यों एवं जानवरों के मृत शरीर को जल में प्रवाहित करना आदि ने जल प्रदूषण को बेतहाशा वृद्धि की है। कानपुर, आगरा, मुंबई, अलीगढ़ और ना जाने कितने नगर उनके कल कारखानों का कचरा यमुना-गंगा जैसी पवित्र नदियों को प्रदूषित करता हुआ सागर तक पहुंच रहा है। औद्योगिक नगर के निकट के जल स्रोतों को दूषित करने में रेडियोएक्टिव व्यर्थ पदार्थ तथा धात्विक पदार्थ भी विशेष योगदान देते हैं। प्लास्टिक की थैलियां, तैलीय पदार्थ तथा कृषि कार्य में प्रयुक्त होने वाले कीटनाशक तथा रासायनिक उर्वरकों के जल में मिलने से भी जल प्रदूषण बढता है।

3. ध्वनि प्रदूषण- ध्वनि प्रदूषण आज की एक नई समस्या है, इसे वैज्ञानिक प्रगति ने पैदा किया है। मोटरकार, ट्रेक्टर, जेट विमान, कारखानों के सायरन, मशीनें, लाउडस्पीकर आदि ध्वनि के संतुलन को बिगाड़ कर ध्वनि प्रदूषण उत्पन्न करते हैं। तेज ध्वनि से श्रवण शक्ति का ह्रास तो होता ही है। साथ ही कार्य करने की क्षमता पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। इससे अनेक प्रकार की बीमारियां पैदा हो जाती हैं। अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण से मानसिक विकृति तक हो सकती है।

4. रेडियोधर्मी प्रदूषण- आज के युग में वैज्ञानिक परीक्षणों का जोर है। परमाणु परीक्षण निरंतर होते ही रहते हैं। इनके विस्फोट से रेडियोधर्मी पदार्थ वायुमंडल में फैल जाते हैं, और अनेक प्रकार से जीवन को क्षति पहुंचाते हैं। दूसरे विश्वयुद्ध के समय हिरोशिमा और नागासाकी में जो परमाणु बम गिराया गए थे उनसे लाखों लोग अपंग हो गए थे, और आने वाली पीढ़ी भी इसके हानिकारक प्रभाव से अभी भी अपने को बचा नहीं पाई है।

5. रासायनिक प्रदूषण- कारखानों से बहते हुए अवशिष्ट द्रव्यों के अतिरिक्त उपज में भी वृद्धि की दृष्टि से प्रयुक्त कीटनाशक दवाइयों और रासायनिक खाद से भी स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ये पदार्थ पानी के साथ बह कर नदी, तालाब और अंततः समुद्र में पहुंच जाते हैं, और जीवन को अनेक प्रकार से हानि पहुंचाते हैं।
प्रदूषण की समस्या और उससे हानियां- निरंतर बढ़ती हुई मानव जनसंख्या, रेगिस्तान का बढ़ते जाना, भूमि का कटाव, ओजोन की परत का सिकुड़ना, धरती के तापमान में वृद्धि, वनों के विनाश तथा औद्योगीकरण ने विश्व के सम्मुख प्रदूषण की समस्या पैदा कर दी है। कारखानों के धुँए से, विषैले कचरे के प्रभाव से तथा जहरीली गैस के रिसाव से आज मानवजीवन समस्या ग्रस्त हो गया है। आज तकनीकी ज्ञान के बल पर मानव विकास की दौड़ में एक-दूसरे से आगे निकल जाने की होड़ में लगा है। इस होड़ में वह तकनीकी ज्ञान का ऐसा गलत उपयोग कर रहा है जो संपूर्ण मानव जाति के लिए विनाश का कारण बन सकता है। युद्ध में आधुनिक तकनीकों पर आधारित मिसाइलों और प्रक्षेपास्त्रो ने जन धन की अपार क्षति तो की ही है। साथ ही पर्यावरण पर भी घातक प्रभाव डाला है। जिसके परिणाम स्वरुप स्वास्थ में गिरावट, उत्पादन में कमी और विकास प्रक्रिया में बाधा आई है। 

प्रदूषण का गंभीर प्रतिकूलप्रभाव मनुष्यों एवं अन्य प्राणियों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। सिरदर्द, आंखें दुखना, खाँसी दमा आदि किसी न किसी रूप में वायु प्रदूषण से जुड़े हुए हैं। प्रदूषित जल के सेवन से मुख्य रुप से पाचन तंत्र सभी रोग उत्पन्न होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार प्रतिवर्ष लाखों बच्चे दूषित जल पीने के परिणामस्वरुप उत्पन्न रोगों से मर जाते हैं। ध्वनि प्रदूषण के भी गंभीर और घातक प्रभाव पढ़ते हैं। ध्वनि प्रदूषण के कारण शारीरिक और मानसिक तनाव तो बढ़ता ही है। साथ ही श्वसन गति और नाड़ी गति में उतार चढ़ाव, जठरातंत्र की गतिशीलता में कमी तथा रुधिर परिसंचरण एवं ह्रदय पेशी के गुणों में भी परिवर्तन हो जाता है। तथा प्रदूषण अन्य अनेकानेक बीमारियों से पीड़ित मनुष्य समय से पूर्वी मृत्यु का ग्रास बन जाता है।

समस्या का समाधान- महान शिक्षाविदों और नीति निर्माताओं ने इस समस्या की ओर गंभीरता से ध्यान दिया है। आज विश्व का प्रत्येक देश इस ओर सजग है। वातावरण को प्रदूषण से बचाने के लिए वृक्षारोपण सर्वश्रेष्ठ साधन है। मानव को चाहिए कि वृक्षों और वनों को कुल्हाड़ियों का निशान बनाने के बजाए उन्हें फलते फूलते देखें तथा सुंदर पशु-पक्षियों को अपना भोजन बनाने के बजाए उनकी सुरक्षा करें। साथ ही भविष्य के प्रति आशंकित, आतंकित होने से बचने के लिए सबको देश की असीमित बढ़ती जनसंख्या को सीमित करना होगा। जिस से उनके आवास के लिए खेतों और वनों को कम ना करना पड़े। कारखाने और मशीनें लगाने की अनुमति उन्हीं व्यक्तियों को दी जानी चाहिए जो औद्योगिक कचरे और मशीनों के धुँए को बाहर निकालने की समुचित व्यवस्था कर सकें। 

संयुक्त राष्ट्र संघ को चाहिए कि वह परमाणु परीक्षण को नियंत्रित करने की दिशा में कदम उठाए। तकनीकी ज्ञान का उपयोग खोए हुए पर्यावरण को फिर से प्राप्त करने पर बल देने के लिए किया जाना चाहिए। वायु प्रदूषण से बचने के लिए हर प्रकार की गंदगी एवं कचरे को विधिवत समाप्त करने के उपाय निरंतर किए जाने चाहिए। जल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए और उद्योगी संस्थानों में ऐसी व्यवस्था की जानी चाहिए कि व्यर्थ पदार्थों एवं जल को उपचारित करके ही बाहर निकाला जाए तथा इस इनको जल स्त्रोतों से मिलने से रोका जाना चाहिए। इंग्लैंड में लंदन का मैला पहले टेम्स नदी में गिर कर जल को दूषित करता था अब वहां की सरकार ने टेम्स नदी के पास एक विशाल कारखाना बनाया है। जिसमें लंदन की सारी गंदगी और मैला मशीनों से साफ होकर उत्तम खाद बन जाता है। और साफ पानी टेम्स नदी में छोड़ दिया जाता है। अब इस पानी में मछलियां पहले से कहीं अधिक संख्या में पैदा हो रही है। ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी उपाय किए जाने चाहिए। सार्वजनिक रूप से लाउडस्पीकर आदि के प्रयोग को नियंत्रित किया जाना चाहिए।

उपसंहार- पर्यावरण में होने वाले प्रदूषण को रोकने व उसके समुचित संरक्षण के लिए समस्त विश्व में एक नई चेतना उत्पन्न हुई है। हम सभी का उत्तरदायित्व है कि चारों ओर बढ़ते इस प्रदूषित वातावरण के खतरों के प्रति सचेत हों तथा पूर्ण मनोयोग से संपूर्ण परिवेश को स्वच्छ सुंदर बनाने का यत्न करें। वृक्षारोपण का कार्यक्रम सरकारी स्तर पर जोर शोर से चलाया जा रहा है। तथा वनों की नियंत्रित कटाई को रोकने के लिए भी कठोर नियम बनाए गए हैं।इस बात के प्रयास किए जा रहे हैं, कि नए वन क्षेत्र बनाए जाएं और जन सामान्य को वृक्षारोपण के लिए प्रोत्साहित किया जाए। 

इधर न्यायालय द्वारा प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को महानगरों से बाहर ले जाने के आदेश दिए गए हैं, तथा नए उद्योगों को लाइसेन्स दिए जाने से पूर्व उन्हें और औद्योगिक कचरे के निस्तारण की समुचित व्यवस्था कर पर्यावरण विशेषज्ञों से स्वीकृति प्राप्त करने को अनिवार्य कर दिया गया है। जनता भी अपने ढंग से इन कार्यक्रमों में सक्रिय सहयोग दें और यह संकल्प ले की जीवन में आने वाले प्रत्येक शुभ अवसर पर कम से कम एक ही वृक्ष लगाएगी तो निश्चित ही हम प्रदूषण के दुष्परिणामों से बच सकेंगे और आने वाली पीढ़ी को भी इसकी काली छाया से बचाने में समर्थ हो सकेंगे।

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