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08 February, 2020

पान वाले को चुना - अकबर बीरबल की कहानी

पान वाले को चुना - अकबर बीरबल की कहानी 

एक बार बादशाह अकबर को पान की तलब हुई। उन्होंने अपने एक ख़ास पान वाले को पान लगाने के लिए कहा। उसने पान बनाकर बादशाह को दे दिया। बादशाह ने चुपचाप पान खाया और उस पान वाले को अगले दिन आधा किलो चूना दरबार में लेकर आने को कहा। वह नहीं जानता था कि बादशाह ने उसे ऐसा क्यों कहा।
वह चुपचाप चूना लेने बाज़ार चला गया। उसने दुकानदार से आधा किलो चूना मांगा। दुकानदार ने उससे पूछा कि इतना चूना क्यों खरीद रहे हो? उसने बताया कि किस तरह उसने बादशाह को पान दिया था। दुकानदार को समझते देर न लगी कि कुछ गड़बड़ है। उसने पान वाले को समझाया कि दरबार में चूना ले कर जाने से पहले बहुत सारा घी पीकर जाना। उसने सलाह मानकर वैसा ही किया और दरबार में जाने से पहले खूब सारा घी पी लिया। 

दरबार में पहुंचने पर बादशाह ने उसे सारा चूना खाने को कहा। वह हैरान रह गया। उसे उम्मीद न थी कि बादशाह ने उसे चूना इसलिए मंगवाया था। लेकिन, वह तो इसके लिए तैयार था। इसलिए, उसने सारा चूना खा लिया। इसके वाबजूद उसे कुछ नहीं हुआ तो बादशाह ने उससे कारण जानना चाहा। उसने अपनी और दुकानदार की बातचीत के बारे में बादशाह को बता दिया। अब बादशाह उस व्यक्ति से मिलने को उतावले हो रहे थे, जिसने उनके मन की बात को पहले ही जान लिया था।

बादशाह ने हुक्म दिया कि उस दुकानदार को अगले दिन दरबार में हाज़िर किया जाए। अगले दिन उस दुकानदार को दरबार में लाया गया। बादशाह ने उससे पूछा कि वह उनके मन की बात को कैसे समझ गया। तब दुकानदार ने कहा, हुज़ूर जब यह आदमी मेरे पास चूना खरीदने आया था तो मैंने इससे पूछा कि इतने चूने का क्या करोगे?

मुझे इसने बताया कि इसने आपको पान बनाकर खिलाया और फिर आपने उसे चूना लाने का हुक्म दिया। तब मुझे समझते देर न लगी कि ज़रूर ग़लती से इसने पान में चूना थोड़ा ज़्यादा लगा दिया होगा, जिसे बादशाह के मुंह में छाले हो गए होंगे और इसी का एहसास करवाने के लिया आपने इससे चूना मंगाया। मैंने इसे सलाह दी की दरबार में जाने से पहले घी पीकर जाना, जिससे अगर तुम्हें चूना खाना भी पड़े तो उसका असर कम हो जाएगा। यह दुकानदार और कोई नहीं बीरबल ही थे।

Lime to betal maker-  Akbar Birbal Story 

Once, King Shahbaz was summoned to drink. He has a special The pan-ginger asked to put a pan. He made a pan and gave it to the king. The king quietly ate the pudding and asked that paan to come in half a kilo lime darbar the next day. He did not know why the emperor told him like this.

He went quietly to take the lime market. He asked for half a kilo lime from the shopkeeper. The shopkeeper asked him why are you buying so much lime? He told how he had drunk the king. The shopkeeper was not late to understand that something is wrong. He explained to Panhe that after drinking a lime in the court, drinking a lot of ghee. He followed the advice and did a lot of ghee before going to the court.

Upon arriving in the court, the king asked him to eat all the lime. He was shocked He had no hope that the king had asked him for lime. But, he was ready for it. Therefore, he ate all the lime. In spite of this, the emperor did not know anything because of him. He told the King about the conversation between himself and the shopkeeper. Now the Emperor was getting excited to meet the person who had already known about his mind.

The emperor ordered that the shopkeeper be presented in the court the next day. The next day the shopkeeper was brought to the court. The emperor asked him how he understood the point of his mind. Then the shopkeeper said, "Huzur, when this man came to buy lime, then I asked him, what would you do with so much lime?

Let me tell you that it has made you drink and fed and then you ordered it to be dried. Then I did not think that it would have been a mistake to put a little more lemon in a mistake, which would have been bruised in the mouth of the king, and to get this feeling, you asked for it to be smoked. I advised that before going to the court, go ghee, so if you also have to eat lime then its effect will be reduced. This shopkeeper was none other than Birbal. 

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