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08 February, 2020

हरा घोड़ा अकबर बीरबल की कहानियाँ

हरा घोड़ा -अकबर बीरबल की कहानियाँ 

एक दिन बादशाह अकबर घोड़े पर बैठकर शाही बाग में घूमने गए। साथ में बीरबल भी था। चारों ओर हरे-भरे वृक्ष और हरी-हरी घास देखकर अकबर को बहुत आनन्द आया। उन्हें लगा कि बगीचे में सैर करने के लिए तो घोड़ा भी हरे रंग का ही होना चाहिए।

उन्होंने बीरबल से कहा, “बीरबल मुझे हरे रंग का घोड़ा चाहिए। तुम मुझे सात दिन में हरे रंग का घोड़ा ला दो। यदि तुम हरे रंग का घोड़ा न ला सके तो हमें अपनी शक्ल मत दिखाना।” हरे रंग का घोड़ा तो होता ही नहीं है। अकबर और बीरबल दोनों को यह मालूम था। लेकिन अकबर को तो बीरबल की परीक्षा लेनी थी।

दरअसल, इस प्रकार के अटपटे सवाल करके वे चाहते थे कि बीरबल अपनी हार स्वीकार कर लें और कहें कि जहांपनाह मैं हार गया, मगर बीरबल भी अपने जैसे एक ही थे। बीरबल के हर सवाल का सटीक उत्तर देते थे कि बादशाह अकबर को मुंह की खानी पड़ती थी।

बीरबल हरे रंग के छोड़ की खोज के बहाने सात दिन तक इधर-उधर घूमते रहे। आठवें दिन वे दरबार में हाजिर हुए और बादशाह से बोले, “जहांपनाह ! मुझे हरे रंग का घोड़ा मिल गया है।” बादशाह को आश्चर्य हुआ। उन्होंने कहा, “जल्दी बताओ, कहां है हरा घोड़ा ? बीरबर ने कहा, “जहांपनाह ! घोड़ा तो आपको मिल जाएगा, मैंने बड़ी मुश्किल से उसे खोजा है, मगर उसके मालिक ने दो शर्त रखी हैं।

बादशाह ने कहा, “क्या शर्ते हैं?"
“पहली शर्त तो यह है कि घोड़ा लेने कि लिए आपको स्वयं जाना होगा।
“यह तो बड़ी आसान शर्त है। दूसरी शर्त क्या है ?
“घोड़ा खास रंग का है, इसलिए उसे लाने का दिन भी खास ही होगा। उसका मालिक कहता है कि सप्ताह के सात दिनों के अलावा किसी भी दिन आकर उसे ले जाओ।

अकबर बीरबल का मुंह देखते रह गए।
बीरबल ने हंसते हुए कहा, “जहांपनाह! हरे रंग का घोड़ा लाना हो, तो उसकी शर्तें भी माननी ही पड़ेगी।
अकबर खिलखिला कर हंस पड़े। बीरबल की चतुराई से वह खुश हुए। समझ गए कि बीरबल को मूर्ख बनाना सरल नहीं है।

Green Horse- Akbar Birbal Story

One day, King Ashbar went on a horse to visit the royal garden. Birbal was also accompanying him. Akbar was very happy to see green trees and green grass around him. They thought that the horse should also be green in order to walk in the garden.

He told Birbal, "Birbal, I want a green horse. You bring me a green horse in seven days. If you can not bring a green horse, do not show us your appearance. "There is no green horse. Both Akbar and Birbal knew this. But Akbar had to take the exam of Birbal.

Indeed, by asking such kind of questions, he wanted Birbal to accept his defeat and say that I lost the Japnah, but Birbal was the same as himself. Birbal had every right to answer that the emperor Akbar had to face a mouth.

Birbal kept roaming around for seven days on the pretext of finding green leaves. On the eighth day he appeared in the court and said to the king, "Jahnpanah! I have got a green horse. "The King was surprised. They said, "Quickly tell, where is the green horse? Birbar said, "Jahnpanah! You will find a horse, I have searched hard for him, but his master has placed two conditions.

The emperor said, "What are the conditions?"
"The first condition is that you have to go yourself to pick up a horse.
"This is a very easy condition. What is the second condition?
"The horse is a special color, so the day of bringing it will be special. His boss says that any day other than seven days of the week, take him away.

Akbar kept watching Birbal's face.
Birbal said laughing, "Japnah! If a green horse is to be brought, then its terms also have to be accepted.
Akbar laughs and blows. He was happy with Birbal's cleverness. Understand that fooling Birbal is not easy.

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