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09 February, 2020

ऊँट की गर्दन - अकबर बीरबल की कहानी

Akbar Birbal Story - आज के इस पोस्ट मे आपको अकबर बीरबल की कहानी ऊँट की गर्दन पढ़ने को मिलेगी। बादशाह अकबर और महामंत्री बीरबल की कहानियो को पढ़कर आपको आनंद की प्राप्ति तो जरूर होती होगी। बीरबल अपने चातुर्य का परिचय समय समय पर अपने राजा अकबर को देते रहते थे। अकबर बीरबल की कहानियाँ, बीरबल की चतुरता के कारण ही तो अपनी अलग पहचान रखती हैं। चलिये पढ़ते है पूरी कहानी ऊंट की गर्दन 

Akbar birbal ki kahani

ऊँट की गर्दन - अकबर बीरबल की कहानी 

अकबर बीरबल की हाज़िर जवाबी के बडे कायल थे। एक दिन दरबार में खुश होकर उन्होंने बीरबल को कुछ पुरस्कार देने की घोषणा की। लेकिन बहुत दिन गुजरने के बाद भी बीरबल को पुरस्कार की प्राप्त नहीं हुई। बीरबल बडी ही उलझन में थे कि महाराज को याद दिलायें तो कैसे?

एक दिन महारजा अकबर यमुना नदी के किनारे शाम की सैर पर निकले। बीरबल उनके साथ था। अकबर ने वहाँ एक ऊँट को घुमते देखा। अकबर ने बीरबल से पूछा, “बीरबल बताओ, ऊँट की गर्दन मुडी क्यों होती है”?
बीरबल ने सोचा महाराज को उनका वादा याद दिलाने का यह सही समय है। उन्होंने जवाब दिया – "महाराज यह ऊँट किसी से वादा करके भूल गया है, जिसके कारण ऊँट की गर्दन मुड गयी है। महाराज, कहते हैं कि जो भी अपना वादा भूल जाता है तो भगवान उनकी गर्दन ऊँट की तरह मोड देता है। यह एक तरह की सजा है।"

तभी अकबर को ध्यान आता है कि वो भी तो बीरबल से किया अपना एक वादा भूल गये हैं। उन्होंने बीरबल से जल्दी से महल में चलने के लिये कहा। और महल में पहुँचते ही सबसे पहले बीरबल को पुरस्कार की धनराशी उसे सौंप दी, और बोले मेरी गर्दन तो ऊँट की तरह नहीं मुडेगी बीरबल। और यह कहकर अकबर अपनी हँसी नहीं रोक पाए।

और इस तरह बीरबल ने अपनी चतुराई से बिना माँगे अपना पुरस्कार राजा से प्राप्त किया।

Camel neck - Akbar Birbal Story

Akbar was highly impressed with Birbal's wittiness. One day pleased with the court, he announced some prizes to Birbal. But Birbal did not receive the award even after passing a lot of days. Birbal was very confused, how to remind Maharaj?

One day, Maharaja Akbar came out on the banks of the river Yamuna. Birbal was with them. Akbar saw a camel roaming there. Akbar asked Birbal, "Tell Birbal, why is the neck of camel closed?"
Birbal thought that this is the right time to remind Maharaj his promise. They replied: "Maharaj, this camel has forgotten by making promises to anyone, due to which the neck of the camel has fallen." Maharaj, says that if anyone forgets his promise, then God turns his neck like a camel. Kind of punishment. "

Then Akbar noticed that he also forgot one of his promises made to Birbal. He asked Birbal to quickly walk in the palace. When he reached the palace, he first handed him the amount of reward to Birbal, and said, my neck would not be like a camel, Birbal. And after saying this, Akbar could not stop laughing.

And in this way, Birbal obtained his prize from the king without any hesitation.
***

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