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Rahul Gandhi on UPI Tax: राहुल का पीएम मोदी पर तीखा तंज, 'UPI टैक्स वापस लो'

Rahul Gandhi on UPI Tax: राहुल गांधी ने हाल ही में लागू हुए नए UPI चार्ज को 'UPI Tax' करार देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है। पूर्व पीएम इंदिरा गांधी के एक पुराने बयान और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का जिक्र करते हुए राहुल ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि यह सिर्फ व्यापारियों के लिए मर्चेंट चार्ज (MDR) है और आम ग्राहकों पर इसका कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे ने अब एक बड़ी राजनीतिक बहस का रूप ले लिया है।

इंदिरा गांधी का जिक्र और पीएम मोदी पर तंज

कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक वीडियो जारी कर नए UPI चार्ज का कड़ा विरोध किया। उन्होंने अपनी दादी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का जिक्र करते हुए पीएम मोदी पर निशाना साधा। राहुल ने बताया कि जब इंदिरा जी से पूछा गया था कि वह राजनीति में 'लेफ्ट' की तरफ हैं या 'राइट' की तरफ, तो उनका जवाब था कि वह न बाएं हैं न दाएं, बल्कि एकदम 'सीधे' (straight) खड़ी हैं। इसी बात का हवाला देते हुए राहुल ने आरोप लगाया कि पीएम मोदी अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप के आगे झुक गए हैं, और इस नए सिस्टम से अमेरिका को मोटा फायदा कमाने का रास्ता मिलेगा।

क्या है नया UPI MDR ढांचा?

सरकार ने हाल ही में UPI पेमेंट्स पर एक नया मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किया है। इसके तहत ₹2,000 से ज्यादा के कुछ खास मर्चेंट ट्रांजैक्शन (व्यापारिक लेन-देन) पर 0.4 प्रतिशत का MDR लगेगा। अगर कोई पेमेंट ₹75,000 या उससे ज्यादा का है, तो यह चार्ज अधिकतम ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन तक ही सीमित रहेगा।

सरकार की सफाई: ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा बोझ

इस पूरे विवाद पर केंद्र सरकार ने साफ किया है कि इसे 'UPI Tax' कहना गलत है। सरकार के मुताबिक, यह चार्ज सिर्फ व्यापारियों के पेमेंट सिस्टम पर लागू होगा, ग्राहकों से सीधे कोई पैसा नहीं वसूला जाएगा। साथ ही, आम लोगों के बीच होने वाले लेन-देन यानी P2P (Person to Person) पेमेंट्स पूरी तरह से फ्री रहेंगे और उन पर कोई शुल्क नहीं लगा है।

RBI के पास फंड है तो चार्ज क्यों?

कांग्रेस पार्टी ने सोशल मीडिया पर आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का दावा है कि पूरे देश में UPI सिस्टम चलाने का सालाना खर्च करीब ₹20,700 करोड़ है। कांग्रेस ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़े पेश करते हुए बताया कि RBI ने केंद्र सरकार को करीब ₹3 लाख करोड़ का सरप्लस ट्रांसफर किया है। इसके अलावा, देश के लिस्टेड बैंकों का मुनाफा ₹4.11 लाख करोड़ से ज्यादा है और खुद NPCI को ₹1,888 करोड़ का प्री-टैक्स प्रॉफिट हुआ है। कांग्रेस का तर्क है कि RBI के सरप्लस का सिर्फ 7.2% हिस्सा ही UPI चलाने के लिए काफी है, तो फिर सरकार के पास पैसे होने के बावजूद यह चार्ज क्यों लगाया जा रहा है?

सरकार पर गुमराह करने का आरोप

कांग्रेस ने सरकार पर अपने पुराने बयानों से पलटने का भी आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि अगस्त में लाए गए टैक्स संशोधन बिल के जरिए ही मुफ्त UPI लेन-देन पर MDR लगाने का रास्ता साफ किया गया था। कांग्रेस ने याद दिलाया कि 6 अगस्त को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि MDR पर कोई फैसला नहीं हुआ है। इसके बाद 10 अगस्त को संसद में भी सरकार ने कहा कि MDR का कोई अंतिम ढांचा तय नहीं है। लेकिन ठीक एक महीने बाद, 14 सितंबर को MDR लागू करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया।

अब यह पूरा मुद्दा सिर्फ आर्थिक व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि एक बड़ी सियासी तकरार में बदल चुका है, जहां विपक्ष इसे आम आदमी पर बोझ बता रहा है और सरकार इसे सिर्फ एक व्यापारिक शुल्क बताकर अपना बचाव कर रही है।

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