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FCRA Bill vs Delimitation Bill: क्या BJP के लिए परिसीमन बिल का समर्थन जुटाना होगा मुश्किल?

FCRA Bill vs Delimitation Bill: संसद में इस समय दो अहम बिलों- FCRA Amendment Bill 2026 और Delimitation Bill (परिसीमन विधेयक) को लेकर सियासत गरमाई हुई है। BJP के लिए धर्मसंकट यह है कि जो पार्टियां परिसीमन बिल पर सरकार का साथ देने को तैयार हैं, वे FCRA बिल के सख्त खिलाफ हैं। अगर सरकार FCRA बिल पर अड़ती है, तो उसे 131वें संविधान संशोधन (परिसीमन) के लिए जरूरी विपक्षी समर्थन खोना पड़ सकता है। इस आर्टिकल में जानिए कि NCP-SP, DMK, YSRCP और कांग्रेस समेत तमाम दलों का इन बिलों पर क्या रुख है और सरकार कैसे इस चक्रव्यूह (catch-22) में फंस गई है।

BJP के लिए क्या है असली 'धर्मसंकट'?

बुधवार दोपहर संसद के गलियारों में यह चर्चा जोरों पर रही कि क्या सरकार इस हफ्ते FCRA संशोधन बिल पेश करेगी या इसे टाल देगी। इसकी मुख्य वजह Delimitation Bill यानी परिसीमन विधेयक है।

FCRA बिल को पास कराने के लिए सरकार को सिर्फ साधारण बहुमत की जरूरत है। लेकिन परिसीमन बिल (131वां संविधान संशोधन) पास कराने के लिए विशेष बहुमत चाहिए। इसके लिए BJP, NDA से बाहर के दलों से भी संपर्क साध रही है। दिक्कत यह है कि DMK और NCP-SP जैसे कई दल FCRA बिल 2026 के सख्त खिलाफ हैं, जबकि YSRCP जैसे दल बहुत फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं।

दक्षिण की क्षेत्रीय पार्टी की शर्तें और YSRCP का रुख

विभिन्न पार्टियों के शीर्ष सूत्रों के अनुसार, दक्षिण की एक प्रमुख क्षेत्रीय पार्टी ने FCRA बिल के मौजूदा ड्राफ्ट पर गहरी चिंता जताई है। ईसाई और अल्पसंख्यक इस पार्टी का मुख्य वोट बैंक हैं। इस दल का कहना है, 'हम सरकार से बातचीत कर रहे हैं। अगर वे हमारे बदलाव मान लें, तो हम समर्थन दे सकते हैं, वर्ना हमें विरोध करना पड़ेगा।'

उन्होंने साफ किया कि उनके लिए वोटिंग से बाहर रहने का कोई विकल्प नहीं है। दिलचस्प बात यह है कि यह पार्टी Delimitation Bill पर सरकार का साथ दे सकती है, बशर्ते BJP संसद की सीटों में 50% की बढ़ोतरी के लिए तैयार हो। लेकिन FCRA पर उनका समर्थन मिलना मुश्किल है। अगर DMK और YSRCP जैसी पार्टियां FCRA का विरोध करती हैं और परिसीमन पर BJP का साथ देती हैं, तो उनके लिए राजनीतिक रूप से एक असहज स्थिति पैदा हो जाएगी।

NCP-SP और DMK की JPC मांग

शरद पवार गुट (NCP-SP) और DMK ने साफ कर दिया है कि वे बिल का न सिर्फ विरोध करते हैं, बल्कि चाहते हैं कि इसे Joint Parliamentary Committee (JPC) के पास भेजा जाए। NCP-SP के एक वरिष्ठ सूत्र ने कहा कि हर डोनर और संस्था पर शक करने की जरूरत नहीं है। चैरिटी का पैसा बच्चों की शिक्षा, अस्पताल और भलाई के काम में लग रहा है। परिसीमन बिल पर समर्थन के सवाल पर NCP-SP ने कहा कि जब तक राजनीतिक दलों के पास उस बिल की ड्राफ्ट कॉपी ही नहीं है, तब तक कोई फैसला नहीं लिया जा सकता।

वहीं, तमिलनाडु चुनावों के बाद कांग्रेस से अलग-थलग हुई DMK भी इस बिल को JPC में भेजने के पक्ष में है। DMK के एक बड़े नेता ने बताया कि यह बिल अल्पसंख्यक संस्थानों, शैक्षणिक संस्थाओं और NGO को परेशान करने का हथियार बन सकता है। सबसे बड़ी आपत्ति इस बात पर है कि सरकार को यह ताकत मिल जाएगी कि वह FCRA फंड से खरीदी गई पुरानी संपत्तियों को भी विवादित बताकर पिछली तारीख से जब्त कर ले।

INDIA Bloc और लेफ्ट पार्टियों का कड़ा विरोध

INDIA Bloc संसद में इस मुद्दे पर तीखी बहस के लिए पूरी तरह तैयार है। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद सैयद नसीर हुसैन ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी कई कारणों से FCRA बिल का विरोध करेगी।

केरल के कांग्रेसी नेताओं ने भी NGO और धार्मिक संस्थाओं पर पड़ने वाले असर पर चिंता जताई है। उनका मानना है कि नौकरशाहों को इतनी ज्यादा पावर देना कि वे पुरानी संपत्तियों पर कार्रवाई कर सकें, चिंता का एक बड़ा कारण है। वहीं, एक वरिष्ठ CPM नेता ने कहा कि इस प्रस्तावित बिल में अधिकारियों को दी गई ताकतें, वक्फ संशोधन (Waqf amendments) के तहत दी गई शक्तियों से भी कहीं ज्यादा हैं।

Delimitation Bill पास होने की कितनी उम्मीद?

आपको बता दें कि पिछले संसदीय सत्र में महिला आरक्षण के तहत लाया गया संविधान संशोधन बिल एकजुट विपक्ष के कारण गिर गया था। लेकिन अब राजनीतिक समीकरण बदल चुके हैं। बंगाल चुनाव में हार के बाद TMC में दरार पड़ गई है। NCPI का नया गठन हुआ है और 'ऑपरेशन टाइगर' की कामयाबी के साथ NDA के सांसदों की संख्या बढ़ गई है।

आंकड़े सुधरने के बाद अब यह माना जा रहा है कि BJP अगले 6 महीनों के अंदर Delimitation Bill को पास कराने की एक और जोरदार कोशिश कर सकती है, क्योंकि यह प्रोजेक्ट अब पहले से कहीं ज्यादा मुमकिन नजर आ रहा है।

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