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UP Protected Monuments 2026: यूपी की 39 ऐतिहासिक धरोहरें 'सख्त सुरक्षा' में, एक पत्थर भी हिला तो होगी सीधी कार्रवाई

UP Protected Monuments 2026: यूपी सरकार ने राज्य के इतिहास और पुरानी विरासतों को सहेजने के लिए एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। अब पर्यटन को सिर्फ आगरा, अयोध्या या काशी तक सीमित रखने के बजाय, पूरे प्रदेश में फैली 3000 साल तक पुरानी धरोहरों को सहेजा जाएगा। इसी कड़ी में 39 नई जगहों को संरक्षित स्मारकों की लिस्ट में शामिल किया गया है।

New Protected Monuments in UP List

सरकार का साफ मैसेज है कि इन ऐतिहासिक जगहों के साथ कोई भी छेड़छाड़ अब बर्दाश्त नहीं होगी। अगर किसी ने अवैध निर्माण किया या एक पत्थर भी इधर-उधर करने की कोशिश की, तो उस पर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

3000 साल पुराना इतिहास और कुषाण ट्रेल

उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के इस विजन के तहत राज्य में संरक्षित स्मारकों की संख्या 278 से बढ़ाकर 300 करने का टारगेट रखा गया है। नई लिस्ट में कई ऐसी जगहें हैं जिनका इतिहास 1000 ईसा पूर्व (BC) से लेकर कुषाण काल तक जाता है।

पर्यटकों को एक नया अनुभव देने के लिए सरकार एक खास कुषाण ट्रेल भी डेवलप कर रही है। यह ट्रेल मथुरा और उसके आस-पास की ऐतिहासिक साइट्स को आपस में जोड़ेगा, ताकि टूरिस्ट पुराने व्यापारिक रास्तों और बौद्ध संस्कृति के असर को करीब से समझ सकें।

Protected Monuments in UP List: किन प्रमुख जगहों को मिला संरक्षण?

आर्कियोलॉजिकल एडवाइजरी कमेटी की बैठक के बाद जिन 39 जगहों को लिस्ट में डाला गया है, उनमें कई प्राचीन टीले, बस्तियों के अवशेष और ऐतिहासिक इमारतें शामिल हैं:

  • परेवाजल टीला (सीतापुर): यह साइट करीब 2500 साल पुरानी है। खुदाई में यहां से पुराने समय के मिट्टी के बर्तन और टेराकोटा की चीजें मिली हैं।
  • महेपासी और मोहन टीला (उन्नाव): महेपासी टीले में कुषाण काल की बस्ती के सबूत मिले हैं। वहीं, साई नदी के किनारे मौजूद मोहन टीले में लगभग 3000 साल पुरानी मानव बस्ती होने के संकेत हैं।
  • शहरों की ऐतिहासिक साइट्स: नवाबों के दौर का लखनऊ का 'मुसा बाग' (जो 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा है), सोनभद्र का 'राजा नल का टीला' और चंदौली का 'मल्हार पुरातात्विक स्थल' भी इस नई लिस्ट का हिस्सा हैं।

प्राचीन मंदिर और ऐतिहासिक कुंड भी सुरक्षित

इस पहल में सिर्फ पुराने टीलों को ही नहीं, बल्कि आस्था के केंद्र रहे प्राचीन मंदिरों और पारंपरिक जल संरचनाओं को भी शामिल किया गया है:

  • सीतापुर का 19वीं सदी का शिव मंदिर (जो लखौरी ईंटों से बना है)।
  • लहरपुर का शिव मंदिर।
  • कानपुर नगर का पंचमुखी शिव मंदिर।
  • हरदोई के प्राचीन नागेश्वर महादेव और जंगलेश्वर महादेव मंदिर।
  • फतेहपुर का मशहूर राधा-कृष्ण मंदिर।
  • श्री गंगाकुंड (रायबरेली): यह एक बेहद ऐतिहासिक जल-परिसर है। करीब 0.74 हेक्टेयर में फैले इस कुंड में पुराने समय के शानदार घाट और पारंपरिक वॉटर मैनेजमेंट सिस्टम देखने को मिलता है।


टूरिज्म और रोजगार को मिलेगा बूस्ट

सरकार का मकसद सिर्फ इन जगहों पर सख्ती बढ़ाना या बाउंड्री बनाना नहीं है। इन साइट्स पर टूरिस्टों के लिए इंटरप्रिटेशन सेंटर, लाइब्रेरी और बेसिक टूरिस्ट फैसिलिटी भी डेवलप की जाएंगी। इससे लोग सिर्फ इतिहास को देखेंगे ही नहीं, बल्कि उसे समझ भी सकेंगे।

अगर यह प्रोजेक्ट सही तरीके से जमीन पर उतरा, तो इससे यूपी में टूरिज्म को एक नया पंख मिलेगा और लोकल स्तर पर रोजगार के ढेरों नए मौके पैदा होंगे।

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