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UP पंचायत चुनाव में देरी पर घिरी सरकार, लोकदल राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह ने उठाए गंभीर सवाल

Lucknow News: भारतीय जनता पार्टी पर आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले गांवों की वास्तविक स्थिति से बचने का आरोप लगाते हुए लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह ने पंचायत चुनावों में हो रही देरी को लेकर सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। राजधानी लखनऊ के 8 मॉल एवेन्यू स्थित केंद्रीय कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि पंचायत चुनावों को टालना महज प्रशासनिक कारणों का परिणाम नहीं, बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है।

Lokdal Rashtriya Adhyaksh Sunil Singh Press Confrence 29 April 2026
लोकदल पार्टी की प्रेस वार्ता में सुनील सिंह

पंचायत चुनाव टालने के पीछे राजनीतिक रणनीति का आरोप

सुनील सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर पंचायत चुनावों में देरी कर रही है, ताकि वह जमीनी स्तर पर अपनी कमजोर होती स्थिति को संभालने के लिए समय हासिल कर सके। उनका कहना था कि लोकतंत्र में सत्ता का आधार जनता होती है, लेकिन वर्तमान स्थिति में सरकार जनता के बजाय अफसरशाही के सहारे व्यवस्था चलाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार जनता के बीच जाकर जवाबदेही निभाएगी या फिर प्रशासनिक तंत्र के पीछे छिपेगी।

मुंबई मॉडल का हवाला, पारदर्शिता पर उठे सवाल

प्रेस वार्ता के दौरान सुनील सिंह ने मुंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां तीन साल से अधिक समय तक चुनाव नहीं कराए गए और हर साल 85,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट अधिकारियों के माध्यम से खर्च किया गया। उन्होंने कहा कि जब इतनी बड़ी धनराशि बिना चुने हुए प्रतिनिधियों की निगरानी के खर्च होती है, तो जवाबदेही समाप्त हो जाती है और भ्रष्टाचार की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी तरह का मॉडल अब उत्तर प्रदेश में लागू करने की कोशिश हो रही है।

सुनील सिंह ने कहा कि पंचायतें लोकतंत्र की सबसे बुनियादी इकाई होती हैं और इन्हें कमजोर करना लोकतंत्र की जड़ों पर सीधा प्रहार है। उनका कहना था कि जब गांवों में चुनी हुई सरकार नहीं होगी, तो फैसले बंद कमरों में लिए जाएंगे और जनता की आवाज शासन तक नहीं पहुंच पाएगी। उन्होंने इसे लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ बताया।

विकास कार्यों पर भी पड़ा असर

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पंचायत चुनावों में देरी के कारण गांवों में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति में प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह हावी हो गया है, जिससे आम लोगों की समस्याओं का समय पर समाधान नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार परिसीमन, आरक्षण और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं का हवाला देकर चुनाव टाल रही है, जबकि इन्हें समय रहते पूरा किया जा सकता था।

बजट खर्च में पारदर्शिता की कमी का आरोप

सुनील सिंह ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पंचायत चुनाव टालने के पीछे एक बड़ा कारण पंचायतों के लिए आवंटित बजट पर सीधा नियंत्रण बनाए रखना है। उनके अनुसार, बिना जनप्रतिनिधियों की निगरानी के इस धनराशि का उपयोग पारदर्शिता और जवाबदेही के अभाव में किया जा रहा है, जिससे भ्रष्टाचार की संभावनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि समय पर चुनाव होते, तो चुने हुए प्रतिनिधि विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाते और बजट के उपयोग पर निगरानी रखते।

चुनाव न होने को बताया अधिकारों का हनन

लोकदल अध्यक्ष ने कहा कि पंचायत चुनावों में देरी सीधे तौर पर जनता के अधिकारों का हनन है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर चुनाव टालकर जनभावनाओं को दबाने और राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है, जो लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।

सुनील सिंह ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार जल्द से जल्द पंचायत चुनाव की घोषणा नहीं करती है, तो लोकदल प्रदेशभर में लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन शुरू करेगा। उन्होंने कहा कि यह केवल चुनाव का मुद्दा नहीं, बल्कि गांव, गरीब और आम नागरिक के अधिकारों की लड़ाई है, जिसे हर हाल में लड़ा जाएगा।

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