देश में किसानों से जुड़े मुद्दों पर एक बार फिर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। लोकदल अध्यक्ष सुनील सिंह ने 15 मई 2026 से फार्मर आईडी को अनिवार्य किए जाने के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे किसानों के खिलाफ तानाशाही करार दिया है।
“किसानों को उनके ही हक से वंचित करने की कोशिश”
सुनील सिंह ने कहा कि सरकार का यह निर्णय किसानों को उनके अधिकारों से दूर करने का नया तरीका है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या अब अन्नदाता को अपनी ही जमीन पर खेती करने के लिए सरकारी पहचान पत्र का मोहताज बनाया जाएगा। उनके अनुसार, यह फैसला किसानों की स्वतंत्रता और अधिकारों पर सीधा प्रहार है।
लोकदल अध्यक्ष ने यह भी चिंता जताई कि जिन किसानों का पंजीकरण समय पर नहीं हो पाएगा, क्या उन्हें खाद, बीज और अन्य सरकारी योजनाओं से वंचित कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा होता है तो यह किसानों के साथ खुला अन्याय होगा और इसे सज़ा देने जैसा कदम माना जाएगा।
डिजिटल क्रॉप सर्वे पर भी उठाए सवाल
सुनील सिंह ने डिजिटल क्रॉप सर्वे को “जमीनी हकीकत से कटा हुआ फैसला” बताया। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी नेटवर्क, संसाधनों और तकनीकी प्रशिक्षण की भारी कमी है। ऐसे में डिजिटल सर्वे केवल कागज़ी प्रक्रिया बनकर रह जाएगा, जिसका सबसे ज्यादा नुकसान छोटे और सीमांत किसानों को उठाना पड़ेगा।
सरकार को दी चेतावनी
लोकदल अध्यक्ष ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि जबरन फार्मर आईडी लागू करने का फैसला तुरंत वापस लिया जाए। उन्होंने मांग की कि किसी भी किसान को सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित करने की साजिश बंद की जाए और जमीनी व्यवस्थाओं को सुधारने से पहले डिजिटल व्यवस्था थोपने की प्रक्रिया रोकी जाए।
सुनील सिंह ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने यह निर्णय वापस नहीं लिया, तो लोकदल किसानों के साथ मिलकर सड़क से लेकर सदन तक बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होगा। उन्होंने कहा कि किसानों के अधिकारों पर किसी भी प्रकार की चोट अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


