UP News: लखनऊ के ईको गार्डन में अपनी मांगों को लेकर कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स (CHO) का अनिश्चितकालीन धरना 10वें दिन भी जारी है। सरकार के साथ हुई उनकी बातचीत पूरी तरह बेनतीजा रही, जिसके बाद ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो गई हैं और मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जानिए क्या हैं इनकी प्रमुख मांगें और सरकार के साथ बातचीत में क्या हुआ।
28 सितंबर से लखनऊ के ईको गार्डन में चल रहे इस धरने के दौरान चारों CHO संगठनों के प्रदेश अध्यक्षों सहित 8 सदस्यों के एक प्रतिनिधिमंडल ने 'पीएस मैडम' से मुलाकात की। इस बातचीत का मकसद समस्याओं का हल निकालना और सरकार को अपनी स्थितियों से अवगत कराना था, लेकिन वार्ता का कोई भी सकारात्मक नतीजा नहीं निकल सका।
प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, पीएस मैडम ने मांगों को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि दूसरे राज्यों में लागू व्यवस्थाओं का उत्तर प्रदेश से कोई लेना-देना नहीं है और राज्य सरकार अपनी नीतियों के हिसाब से ही काम करेगी।
क्या हैं CHO की प्रमुख मांगें?
बहराइच और तेजवापुर सहित कई अन्य जिलों से आए CHO इस धरने में एकजुटता दिखाते हुए शामिल हुए हैं। इनकी मुख्य मांगों में शामिल हैं:
- समान कार्य के लिए समान वेतन।
- संवर्ग का कैडर निर्माण और नियमितीकरण (रेगुलराइजेशन)।
- 4800 ग्रेड पे।
- पीबीआई (PBI - प्रोत्साहन आधारित भुगतान) को उनके मूल वेतन में मर्ज या समायोजित करना।
- खाली पदों पर ट्रांसफर और म्यूचुअल ट्रांसफर की व्यवस्था शुरू करना।
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं पर बुरा असर, मरीज परेशान
ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में 'आयुष्मान आरोग्य मंदिर' के जरिए प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं देने में CHO अहम भूमिका निभाते हैं। लेकिन इस आंदोलन की वजह से ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं पर गहरा असर पड़ा है। बहराइच समेत कई ग्रामीण क्षेत्रों के आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में ताले लटक रहे हैं।
इसके चलते इलाज और स्वास्थ्य परामर्श के लिए आने वाले ग्रामीणों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। मजबूरन मरीजों को प्राथमिक उपचार और जांच के लिए दूर के पीएचसी, सीएचसी, मेडिकल कॉलेज या फिर प्राइवेट अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।
आगे क्या होगा?
लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे कर्मचारियों को इस वार्ता से काफी उम्मीदें थीं। लेकिन सरकार की तरफ से कोई ठोस समाधान न मिलने के बाद, CHO संगठनों ने फैसला किया है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक उनका यह अनिश्चितकालीन आंदोलन ईको गार्डन में ऐसे ही जारी रहेगा। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और CHO संगठनों के बीच आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

