MP Fake Officer Scam: मध्य प्रदेश में इन दिनों सरकारी नौकरी और टेंडर दिलाने के नाम पर आम लोगों को लूटने वाले एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। खुद को IAS, IPS या केंद्र सरकार का बड़ा अधिकारी बताकर ये जालसाज लोगों से लाखों रुपये ऐंठ रहे थे। पुलिस ने भोपाल, इंदौर और अशोकनगर से 'लेडी नटवरलाल' समेत कई फर्जी अफसरों को गिरफ्तार किया है। पिछले एक महीने के भीतर ऐसे करीब 5 मामले सामने आ चुके हैं, जिससे पता चलता है कि यह सिंडिकेट कितने बड़े पैमाने पर एक्टिव था। आइए जानते हैं इन फर्जी अफसरों की पूरी कहानी और कैसे खुला इनका राज।
सरकारी अफसर बनकर करते थे ठगी
मध्य प्रदेश में फर्जी अफसरों का एक बड़ा गिरोह काफी समय से लोगों को अपना शिकार बना रहा था। ये ठग खुद को राज्य या केंद्र सरकार के बड़े विभागों का अफसर बताते थे। इनका महंगा रहन-सहन और रौब इतना असली लगता था कि कोई भी आम इंसान आसानी से इनके बुने जाल में फंस जाता था। ये जालसाज युवाओं को सरकारी नौकरी या लोगों को टेंडर दिलाने का लालच देकर उनसे मोटी रकम वसूलते थे।
इनोवा पर 'भारत सरकार' और 'लेडी नटवरलाल' का खेल
ग्वालियर और भोपाल से जुड़ी तृप्ति सिंह राजपूत और उसके भाई सुधांशु की कहानी बिलकुल किसी फिल्मी पटकथा जैसी है। खुद को एमपी टूरिज्म में एडिशनल हेड या सीनियर IAS अफसर बताने वाली तृप्ति को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने जब भोपाल के बागसेवनिया और अशोकनगर के चंदेरी में दर्ज मामलों की जांच की, तो आरोपियों के पास से एक किराए की इनोवा कार मिली, जिस पर 'भारत सरकार' लिखा हुआ था।
इसके अलावा पुलिस को इनके पास से फर्जी CBI आईडी कार्ड, सरकारी लेटरहेड और महंगे आईफोन भी मिले हैं। यह गिरोह मानव संसाधन विकास मंत्रालय में नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगारों से 10-10 लाख रुपये की वसूली कर चुका था।
Spelling Mistake ने खोली फर्जी IPS की पोल
ठगी के इस बड़े खेल में एक मामला फर्जी IPS ऋषि कुमार यादव का भी है। यह शख्स खुद को 2016 बैच का IPS और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में जॉइंट इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर बताता था। इसने खासकर UPSC की तैयारी कर रहे दर्जनों छात्रों को अपना निशाना बनाया। इनकम टैक्स में नौकरी लगवाने का झांसा देकर इसने अभ्यर्थियों से 8 लाख रुपये ठग लिए।
हालाँकि, इसकी चालाकी तब धरी रह गई जब इसके द्वारा दिए गए फर्जी जॉइनिंग लेटर में 'Spelling Mistakes' पकड़ी गईं। पीड़ितों को शक हुआ और उन्होंने शिकायत कर दी, जिसके बाद पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए इस फर्जी IPS को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।
इंदौर, नरसिंहपुर और उज्जैन में भी फैला था जाल
ठगी का यह गोरखधंदा सिर्फ भोपाल या ग्वालियर तक सीमित नहीं था, बल्कि छोटे शहरों में भी इसके तार फैले हुए थे:
- इंदौर: यहाँ हिमांशु पांचाल नाम का एक शख्स अपने घर के बाहर 'IAS राज सोनी' की नेमप्लेट लगाकर रहता था। एक बड़े होटल में खाना खाने के बाद जब इसने बिना पैसे दिए अपना रौब झाड़ने की कोशिश की, तो होटल स्टाफ की सूचना पर पुलिस ने इसे पकड़ लिया।
- नरसिंहपुर: यहाँ एक मैट्रिमोनियल साइट (Matrimonial Site) के जरिए एक जालसाज ने खुद को IAS डॉक्टर बताकर एक महिला डॉक्टर को फंसाया और उससे 3 लाख रुपये ठग लिए।
- उज्जैन: यहाँ भी एक ठग खुद को केंद्र सरकार का जॉइंट सेक्रेटरी बताकर VIP सुविधाओं का लुत्फ उठाते हुए पकड़ा गया।
2021 से एक्टिव था सिंडिकेट
इस गिरोह के हौसले कितने बुलंद थे, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मुख्य आरोपी तृप्ति राजपूत और उसके नेटवर्क का विधानसभा परिसर के अंदर का एक वीडियो भी वायरल हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा सिंडिकेट 2021 से लगातार एक्टिव था और लोगों से पैसे लेकर अफसर बनाने का झूठा वादा कर रहा था।
फिलहाल पुलिस ने इस गिरोह के मुख्य चेहरों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने साफ कर दिया है कि सरकारी पदों का रौब दिखाने वाले अनजान लोगों पर बिना जांच-पड़ताल के भरोसा करने से बचने की सख्त जरूरत है।

