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New World Map: 450 साल पुराना नक्शा बदला, UN में हारा अमेरिका, जानिए कैसा होगा नया Equal Earth World Map?

New World Map: बचपन से हम किताबों में दुनिया का जो World Map देखते आ रहे हैं, वह दरअसल गलत है। इसी सदी पुराने भौगोलिक भ्रम को दूर करने के लिए UN (संयुक्त राष्ट्र) ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। UN General Assembly ने 16वीं सदी के पुराने मर्केटर मैप को हटाकर एक नया 'Equal Earth' वर्ल्ड मैप अपनाने का प्रस्ताव पास कर दिया है। इस प्रस्ताव को 164 देशों का भारी समर्थन मिला, जबकि अमेरिका इस वोटिंग में अकेला विरोध करने वाला देश रहा। यह नया नक्शा अफ्रीका और अन्य भूमध्यरेखीय देशों के असली आकार को दुनिया के सामने लाएगा। आइए जानते हैं इस नए वर्ल्ड मैप की पूरी कहानी और इससे जुड़े विवाद।

UN में पास हुआ प्रस्ताव, अमेरिका ने किया विरोध

UN General Assembly में पारंपरिक नक्शे को बदलने के लिए एक अहम वोटिंग हुई। अफ्रीकन यूनियन के समर्थन से टोगो ने 'Correct the Map' (नक्शे को सही करें) नाम का यह प्रस्ताव पेश किया था। इस प्रस्ताव को फ्रांस और UK सहित 164 देशों का समर्थन मिला।

हैरानी की बात यह रही कि अमेरिका इकलौता ऐसा देश था जिसने इसके खिलाफ वोट किया। अमेरिका का तर्क था कि यह एक 'वैचारिक एजेंडा' है जो असली मुद्दों से ध्यान भटकाता है। इसके अलावा 6 देशों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। हालांकि UN का यह फैसला बाध्यकारी नहीं है, लेकिन इसके पास होने से दुनिया भर के प्रमुख संस्थानों में अब नए नक्शे का इस्तेमाल शुरू हो जाएगा, जिससे आने वाले समय में दुनिया का भूगोल एक नए नजरिए से देखा जाएगा।

पुराने Mercator Projection में क्या खराबी थी?

हम आज तक स्कूलों, किताबों और Google Maps में जो नक्शा देखते आए हैं, उसे 'Mercator Projection' कहा जाता है। इसे 1569 में गेरार्डस मर्केटर नाम के कार्टोग्राफर ने बनाया था, ताकि यूरोपीय नाविक समुद्री जहाजों के रास्ते आसानी से तय कर सकें।

दिक्कत यह है कि हमारी धरती गोल (3D) है और उसे एक चपटे कागज (2D) पर बिल्कुल सही-सही उतारना नामुमकिन है। इस पुराने नक्शे में ध्रुवों (poles) के पास वाले देश बहुत बड़े दिखते हैं, जबकि भूमध्य रेखा (equator) के करीब वाले देश सिकुड़कर छोटे हो जाते हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण ग्रीनलैंड और अफ्रीका है। पुराने मैप में ग्रीनलैंड और अफ्रीका का साइज एक बराबर लगता है, जबकि हकीकत में अफ्रीका, ग्रीनलैंड से 14 गुना ज्यादा बड़ा है।

कैसा है नया Equal Earth World Map?

मैप की इस पुरानी कमी को दूर करने के लिए साल 2018 में विशेषज्ञों की एक टीम ने समान क्षेत्रफल वाला एक नक्शा तैयार किया, जिसे 'Equal Earth Projection' नाम दिया गया। इसी साल फरवरी में अफ्रीकन यूनियन के 54 सदस्य देशों ने इसे अपनाया था।

ऑनलाइन कैंपेन ग्रुप 'CorrectTheMap' के मुताबिक, अफ्रीका इतना विशाल है कि इसके अंदर पूरा अमेरिका, चीन, भारत, जापान, मैक्सिको और यूरोप के कई हिस्से एक साथ समा सकते हैं, और फिर भी काफी जमीन बच जाएगी।

जो नया नक्शा बनाया गया है, उसमें अफ्रीका अपने असली और विशाल आकार में नजर आ रहा है। वहीं, यूरोप, रूस और ग्रीनलैंड अब अपने सही यानी छोटे आकार में नजर आते हैं। इसके अलावा नए नक्शे में ब्राजील और दक्षिण अमेरिका भी पहले से बड़े दिख रहे हैं।

नक्शे में बदलाव करना क्यों जरूरी था?

आलोचकों और अफ्रीकी देशों का मानना है कि पुराने नक्शे में उनके महाद्वीप को छोटा दिखाना सिर्फ एक भौगोलिक गलती नहीं थी, बल्कि यह 'Cartographic Colonialism' और मानसिक गुलामी का प्रतीक है। इससे भूमध्य रेखा के पास वाले देशों की विकास संबंधी जरूरतों को कम करके आंका जाता रहा है।

टोगो के विदेश मंत्री रॉबर्ट डुसी ने इस बदलाव पर कहा, 'एक निष्पक्ष दुनिया की शुरुआत एक निष्पक्ष नक्शे से होती है।' उनका कहना है कि गलत नक्शा देखने से लोगों के मन में यह छवि बनती है कि अफ्रीका एक छोटा और पिछड़ा हुआ इलाका है, जिससे दुनिया वहां की अर्थव्यवस्था, निवेश और विकास की क्षमताओं को नजरअंदाज करती है।

इस कदम की तारीफ करते हुए फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने भी अपना समर्थन दिया और ऐलान किया कि उनका मंत्रालय अब पुराने मर्केटर मैप का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करने जा रहा है।

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