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UP Vigilance Raid: रिटायर एआरटीओ ललित कुमार के घर मिला 35 करोड़ का 'काला खजाना'

सार: यूपी के रिटायर एआरटीओ (ARTO) ललित कुमार के लखनऊ वाले घर पर विजिलेंस का छापा पड़ा है। यह कोई मामूली रेड नहीं थी, बल्कि घर के चप्पे-चप्पे से 'कुबेर का खजाना' निकला है। दीवारों और अलग-अलग पैकेटों में छिपाकर रखा गया 1.62 करोड़ कैश, 13 किलो सोना, 9 किलो चांदी और 15 जमीनों के कागज बरामद हुए हैं। कुल मिलाकर करीब 35 करोड़ रुपये की काली कमाई का पर्दाफाश हुआ है। विजिलेंस की जांच में सामने आया है कि इस अधिकारी ने अपनी जायज कमाई से करीब 73.6 प्रतिशत ज्यादा पैसा खर्च किया था। आखिर कैसे एक सरकारी बाबू ने खड़ा कर लिया इतना बड़ा प्रॉपर्टी का साम्राज्य? जानिए इस रेड की पूरी इनसाइड स्टोरी।

दीवारों में छिपा था करोड़ों का कैश

सोचिए, आप किसी घर में जाएं और वहां दीवारों और पैकेटों में नोटों की गड्डियां भरी मिलें! यूपी विजिलेंस की टीम के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। कोर्ट से वारंट मिलने के बाद, टीम ने 7 और 8 जुलाई को लखनऊ के अलीगंज स्थित चंद्रलोक कॉलोनी में रहने वाले पूर्व ARTO ललित कुमार के घर पर रेड मारी। करीब 26 घंटे चली इस तलाशी में विजिलेंस टीम की आंखें फटी रह गईं, जब घर के गुप्त स्थानों से कैश और सोना-चांदी निकलने लगा।

35 करोड़ की प्रॉपर्टी: सोना, चांदी और लग्जरी गाड़ियां

विजिलेंस को घर से क्या-क्या मिला, इसकी लिस्ट देखकर किसी के भी होश उड़ जाएंगे:

  • कैश: घर के अलग-अलग कमरों और दीवारों में छिपाकर रखे गए 1.62 करोड़ रुपये नकद मिले।
  • सोना-चांदी: 13 किलो सोना (बिस्किट और ईंटें) और 9 किलो चांदी (ईंटें और सिक्के) बरामद हुई। हीरे और इन सभी आभूषणों की कुल कीमत करीब 20 करोड़ रुपये आंकी गई है।
  • जमीनों के कागज: 15 जगहों की अचल संपत्ति के कागजात मिले, जिनकी अनुमानित कीमत 13 करोड़ रुपये है। इनमें लखनऊ के पॉश इलाकों (अलीगंज, मोहनलालगंज) में घर और प्लॉट, नोएडा में फ्लैट बुकिंग, और बाराबंकी व रायबरेली में खेती की जमीनें शामिल हैं।
  • इन्वेस्टमेंट: बैंक, पोस्ट ऑफिस, म्यूचुअल फंड और फिक्स्ड डिपॉजिट में 1 करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश का सबूत मिला है।
  • अन्य सामान: टोयोटा इनोवा और हुंडई i20 कार के साथ-साथ एक रिवॉल्वर भी बरामद की गई है।

कौन हैं ललित कुमार और कैसे खुला राज?

ललित कुमार मूल रूप से रायबरेली (सेंगहो कोठी) के रहने वाले हैं और परिवहन विभाग में एआरटीओ (ARTO) के पद से रिटायर हुए हैं। इससे पहले वे कानपुर में रीजनल इंस्पेक्टर टेक्निकल थे और जून 2022 से दो साल तक आगरा में भी तैनात रहे।

उनका खेल तब बिगड़ा जब कानपुर तैनाती के दौरान उन पर करप्शन की शिकायत हुई और 2024 में आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज हुआ। विजिलेंस जांच में पता चला कि उनकी कुल जायज कमाई 93.26 लाख रुपये थी, लेकिन उन्होंने संपत्तियों और अपने रहन-सहन पर 1.61 करोड़ रुपये उड़ा दिए। इसका सीधा मतलब था कि उन्होंने अपनी कमाई से 68.66 लाख रुपये (करीब 73.6%) ज्यादा खर्च किया। जब जांच एजेंसी ने इस एक्स्ट्रा खर्च का हिसाब मांगा, तो वे कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।

विजिलेंस टीम को मिला ईनाम

इस बड़े खुलासे और शानदार कार्रवाई के लिए उत्तर प्रदेश विजिलेंस के महानिदेशक (DG) ने लखनऊ सेक्टर की इस पूरी टीम को 1 लाख रुपये का नकद ईनाम देने का ऐलान किया है। फिलहाल बरामद हुए सभी दस्तावेजों और बेनामी संपत्तियों का वेरिफिकेशन किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद इस पूर्व अधिकारी के खिलाफ कोर्ट में सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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