सार: मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में सियासी पारा काफी हाई है। कांग्रेस के सीनियर नेता दिग्विजय सिंह ने पूर्व गृह मंत्री और दिग्गज बीजेपी नेता नरोत्तम मिश्रा पर तीखा हमला करते हुए उनकी पहचान 'आतंक, अन्याय और अत्याचार' से बताई है। एक समय पर मध्य प्रदेश के 'बुलडोजर मैन' के नाम से मशहूर नरोत्तम मिश्रा का राजनीतिक ग्राफ अब काफी नीचे आ चुका है। बीजेपी ने इस उपचुनाव में उनका टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा है। यह आर्टिकल दतिया की मौजूदा राजनीति, कांग्रेस की रणनीति और नरोत्तम मिश्रा के सियासी डाउनफॉल की इनसाइड स्टोरी को सामने रखता है।
दिग्विजय सिंह का नरोत्तम मिश्रा पर तीखा वार
दतिया उपचुनाव के लिए कांग्रेस कैंडिडेट घनश्याम सिंह के नॉमिनेशन के मौके पर दिग्विजय सिंह ने नरोत्तम मिश्रा को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह एक शांत और समझदार इंसान हैं, जो हमेशा जन-कल्याण में लगे रहते हैं। इसके उलट, नरोत्तम मिश्रा की छवि हमेशा आतंक और अन्याय वाली रही है। दिग्विजय ने यह भी तंज कसा कि घनश्याम सिंह का परिवार दतिया की असल पहचान है, जबकि बीजेपी के नेता बाहर (डबरा) से आए हैं, इसलिए टिकट हमेशा किसी लोकल चेहरे को ही मिलना चाहिए।
VIDEO | Datia, Madhya Pradesh: On Datia assembly bye-election nomination and Narottam Mishra row, Congress leader Digvijaya Singh says, "Congress candidate for the Datia bypolls and a member of the erstwhile Datia royal family, Ghanshyam Singh, is very mature and calm, the exact… pic.twitter.com/40xLVmfNoP
— Press Trust of India (@PTI_News) July 13, 2026
बीजेपी की अंदरूनी कलह
जब दिग्विजय सिंह से कांग्रेस की गुटबाजी के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने इसे सीधे बीजेपी की तरफ मोड़ दिया। उनका कहना था कि दतिया में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने जिस तरह से पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम मोहन यादव के खिलाफ बयानबाजी और नारेबाजी की है, वह बीजेपी की अंदरूनी कलह का सबसे बड़ा सबूत है। उनका साफ कहना था कि जो लोग पीएम मोदी के खिलाफ एक शब्द नहीं सुन सकते, उनके अपने ही कार्यकर्ता वहां नारे लगा रहे हैं; अगर बीजेपी इसे कलह नहीं मानती, तो उन्हें भी कोई ऐतराज नहीं है।
'बुलडोजर मैन' से हाशिए तक का सफर
मध्य प्रदेश की सियासत में नरोत्तम मिश्रा कभी नंबर दो की हैसियत रखते थे। यूपी के सीएम योगी की तर्ज पर एमपी में बुलडोजर एक्शन शुरू करने वाले मिश्रा हमेशा अपने सख्त फैसलों से ज्यादा विवादित बयानों को लेकर चर्चा में रहे। फिल्मों और विज्ञापनों पर 'अघोषित मोरल पुलिसिंग' को लेकर उनका रवैया इतना सख्त था कि उन्हें खुद पीएम मोदी से बिना वजह बयानबाजी न करने की नसीहत मिल चुकी थी। विकास के बजाय लगातार विवादों में घिरे रहने का ही नतीजा था कि 2023 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की भारी लहर के बावजूद वे कांग्रेस के राजेंद्र भारती से 7,500 से अधिक वोटों से चुनाव हार गए।
क्यों कटा नरोत्तम मिश्रा का टिकट?
2023 की करारी हार के बाद से ही नरोत्तम मिश्रा पार्टी में किनारे लगा दिए गए। सूबे में मोहन यादव की सरकार बनी तो उन्हें कैबिनेट से दूर रखा गया और लोकसभा चुनाव में भी पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया।
अब दतिया उपचुनाव में भी बीजेपी ने नरोत्तम मिश्रा की जगह एक नए और विवाद-रहित चेहरे, आशुतोष तिवारी पर दांव लगाया है। इसके पीछे दो मुख्य कारण माने जा रहे हैं:
- स्थानीय नाराजगी: उनके कड़े तेवरों के कारण दतिया के एक बड़े वर्ग में उनके खिलाफ गुस्सा था।
- पावर सेंटर का डर: बीजेपी आलाकमान एमपी में सीएम मोहन यादव के अलावा कोई नया शक्ति केंद्र नहीं खड़ा करना चाहता था। अगर मिश्रा उपचुनाव जीतते, तो उनके मंत्री बनने से पार्टी के भीतर एक नया पावर सेंटर बन सकता था।
ब्राह्मण चेहरे की जगह दूसरे ब्राह्मण कैंडिडेट को उतारकर पार्टी ने कास्ट इक्वेशन तो साध लिया है, लेकिन नरोत्तम मिश्रा की सियासत फिलहाल पूरी तरह से बुलडोज होती नजर आ रही है।

