सार: अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में हुए चढ़ावा चोरी मामले की आंच अब बैंकिंग सिस्टम तक पहुंच गई है। पुलिस और SIT ने इस मामले में SBI (भारतीय स्टेट बैंक) समेत करीब 6 से 7 बैंकों को नोटिस भेजा है। जांच एजेंसियां अब चोरी के पैसों का 'Money Trail' खंगाल रही हैं और आरोपियों के बैंक खातों को फ्रीज करने की तैयारी चल रही है। यह आर्टिकल आपको बताएगा कि कैसे राम मंदिर ट्रस्ट के पैसों की गिनती में सेंधमारी हुई, इसमें बैंक और आउटसोर्स कर्मचारियों का क्या रोल था, और चाक-चौबंद सुरक्षा के बावजूद इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई।
बैंकों तक पहुंची पुलिस की जांच
अयोध्या में राम मंदिर की दान पेटियों से चोरी का मामला लगातार गहराता जा रहा है। अब पुलिस की जांच सीधे बैंकों तक जा पहुंची है। पुलिस ने मामले की तह तक जाने के लिए SBI, बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB), केनरा बैंक और पंजाब नेशनल बैंक (PNB) समेत कई बैंकों को नोटिस जारी किया है।
सोमवार को पुलिस की एक विशेष टीम SBI की तुलसी उद्यान (नया घाट) शाखा पहुंची, जहां राम मंदिर ट्रस्ट का मुख्य बैंक अकाउंट संचालित होता है। टीम ने बैंक के अधिकारियों और मैनेजर से लंबी पूछताछ की। पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही है कि मंदिर से बैंक तक कैश पहुंचने और जमा होने का एक्चुअल प्रोसेस क्या था और इसमें किन नियमों का पालन किया जाता था।
पैसों का Money Trail और खाते फ्रीज करने की तैयारी
पुलिस और SIT (Special Investigation Team) का मुख्य फोकस अब पैसों के फ्लो को ट्रेस करने पर है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि चोरी की रकम किन-किन खातों में गई और उसका इस्तेमाल कहां हुआ। इसके लिए:
- पुलिस ने आरोपियों के Bank Statements और सभी वित्तीय लेन-देन का रिकॉर्ड तलब किया है।
- मामले की जांच प्रभावित न हो, इसके लिए आरोपियों के बैंक अकाउंट्स को फ्रीज (Freeze) करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
- आरोपियों के घरों पर छापेमारी करके उनके बैंकिंग डॉक्युमेंट्स भी खंगाले गए हैं।
बैंक कर्मचारियों और आउटसोर्स स्टाफ की भूमिका
चढ़ावे के नोटों को सीधा करने, बंडल बनाने और बैंक तक सुरक्षित पहुंचाने की जिम्मेदारी बैंक कर्मचारियों और आउटसोर्सिंग स्टाफ की थी। पुलिस इस मामले में अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें से सुभाष और टीन्नु को छोड़कर बाकी सभी आउटसोर्सिंग एजेंसी के कर्मचारी बताए जा रहे हैं।
SBI की शाखा से जुड़े दो कर्मचारी, रत्नेश और गगनदीप भी जांच के दायरे में हैं। हालांकि, अभी तक बैंक के परमानेंट कर्मचारियों की डायरेक्ट मिलीभगत के पक्के सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन करीब दो दर्जन बैंक कर्मियों से पूछताछ की जा चुकी है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि इन कर्मचारियों की नियुक्ति किस प्रक्रिया के तहत और किसकी सिफारिश पर की गई थी।
ट्रस्ट का करोड़ों का फंड
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट बैंकों के लिए एक बहुत बड़ा ग्राहक है। सूत्रों के मुताबिक, साल 2021 में ट्रस्ट का करीब 3500 करोड़ रुपये SBI में जमा था, जो वर्तमान में लगभग 1000 करोड़ रुपये है। इसके अलावा, बैंक ऑफ बड़ौदा में करीब 500 करोड़ और PNB में 400 करोड़ रुपये जमा होने की बात सामने आई है। इतना बड़ा क्लाइंट होने की वजह से ट्रस्ट की सिफारिशों को बैंक काफी गंभीरता से लेते रहे हैं।
सुरक्षा व्यवस्था और CCTV की निगरानी पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल सिक्योरिटी सिस्टम पर उठ रहा है।
कैश गिनने वाले कमरे में CCTV कैमरे लगे हुए थे और इन कैमरों का सीधा एक्सेस राम मंदिर ट्रस्ट के पास था। इसके अलावा, कमरे के अंदर जाने और बाहर आने पर कर्मचारियों की प्रॉपर तलाशी की व्यवस्था भी थी।
ऐसे में जांच एजेंसियां अब यह सुराग ढूंढ रही हैं कि:
- अगर नकदी चोरी हुई, तो वह CCTV कैमरों की नजर से कैसे बच गई?
- एंट्री और एग्जिट पॉइंट पर ली जाने वाली तलाशी के दौरान कोई भी कर्मचारी कैश के साथ क्यों नहीं पकड़ा गया?
- निगरानी के इस पूरे सिस्टम में असल चूक किस लेवल पर हुई?
पुलिस इन तमाम सवालों के जवाब तलाशने के लिए बैंक रिकॉर्ड्स, CCTV फुटेज और आरोपियों के बयानों का आपस में मिलान कर रही है, ताकि इस चोरी के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हो सके।

