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Ram Mandir Donation Theft: जकार्ता से गरजे धीरेंद्र शास्त्री, कहा 'यह श्रद्धा की चोरी है', यूपी पुलिस ने 8 को किया अरेस्ट

सार: अयोध्या के राम मंदिर में हुए दान घोटाले ने देश-विदेश में हलचल मचा दी है। इस मामले पर दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम देश इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में कथा कर रहे बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने भावुक होते हुए इस घटना को 'श्रद्धा की चोरी' बताया और आरोपियों की तुलना रावण से की। उनका कहना है कि ऐसे लोगों को सरकारी सजा के साथ-साथ भगवान का 'महादंड' भी जरूर मिलेगा।

दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश पुलिस ने SIT की जांच रिपोर्ट के बाद कड़ा एक्शन लेते हुए 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने इनके पास से करीब 80 लाख रुपये भी बरामद किए हैं। इस मुद्दे पर अब सियासी घमासान भी शुरू हो गया है, विपक्ष का आरोप है कि मामले में 'बड़ी मछलियों' को बचाया जा रहा है।

रावण के बदले हुए रूप: धीरेंद्र शास्त्री का तीखा प्रहार

जकार्ता में अपने कार्यक्रम के दौरान राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर बोलते हुए धीरेंद्र शास्त्री काफी भावुक नजर आए। उन्होंने इस चोरी की तुलना त्रेतायुग में हुए माता सीता के हरण से कर दी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, "रावण तो ये भी हैं, बस रूप बदल गए हैं। रावण ने तो केवल माता जानकी की चोरी की थी, जिसका परिणाम यह हुआ कि उसके पूरे परिवार का नाश हो गया। लेकिन इन लोगों ने राम मंदिर के दान पात्र से करोड़ों लोगों की श्रद्धा और भरोसा चुराया है।"

उन्होंने पुलिस के एक्शन पर संतोष जताते हुए कहा कि एफआईआर दर्ज हो गई है और जांच के बाद अभी और भी लोग पकड़े जाएंगे। बाबा बागेश्वर ने चेतावनी देते हुए कहा कि जो भी राम के दान की चोरी करेगा, उसे कानून तो सजा देगा ही, लेकिन वह भगवान के 'महादंड' से भी नहीं बच पाएगा।

पुलिस का एक्शन और SIT की जांच में क्या मिला?

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के दानपात्रों में हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद यूपी सरकार ने 13 जून को लखनऊ मंडल के कमिश्नर विजय विश्वास पंत की अगुवाई में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। एसआईटी ने जब अपनी शुरुआती रिपोर्ट शासन को सौंपी, तो उसके तुरंत बाद 25 जून को एफआईआर दर्ज कर ली गई।

यह एफआईआर ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की कई धाराओं के तहत दर्ज की गई है। एफआईआर दर्ज होने के कुछ ही घंटों के अंदर यूपी पुलिस ने एक बड़ा नेटवर्क क्रैक करते हुए 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

पकड़े गए आरोपियों में अनुकल्प मिश्रा, रमाशंकर यादव (टिन्नू), अविनाश शुक्ला, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्रा और सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं। पुलिस की जांच में यह सामने आया है कि यह एक पूरा नेटवर्क था, जो फर्जी रसीदों के जरिए श्रद्धालुओं को गुमराह करके दान का पैसा अपनी जेब में डाल रहा था। पुलिस ने इन आरोपियों के पास से 79.85 लाख रुपये बरामद किए हैं और इन सभी को 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

'बड़ी मछलियों को बचाया जा रहा है'

राम मंदिर जैसे संवेदनशील मुद्दे पर घपले की खबर आते ही सियासत भी गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के चीफ अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए इसे भाजपा का "लंकाकांड" बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि SIT जांच की आड़ में सबूत मिटाए जा सकते हैं और इस घोटाले में सिर्फ छोटी मछलियों को फंसाकर बड़ी मछलियों को बचाया जा रहा है।

आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी इसे 'धर्मयुद्ध' बताते हुए ऐसे चंदा चोरों के सामाजिक बहिष्कार की मांग की है। वहीं, कांग्रेस ने तो इस पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने और मौजूदा ट्रस्ट को भंग करने तक की मांग कर डाली है।

इन राजनीतिक आरोपों के बीच, बाबरी ढांचा केस के प्रमुख आरोपियों में से एक रहे संतोष दुबे ने भी ट्रस्ट की वर्किंग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बिना किसी बड़े पदाधिकारी की मिलीभगत के इतना बड़ा गबन मुमकिन नहीं है। उन्होंने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदारी तय की जाए।

हालांकि, विपक्ष के इन हमलों पर पलटवार करते हुए यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि यह सिर्फ कांग्रेस और सपा की साजिश है और वे इस मुद्दे पर राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी साफ कर दिया है कि लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

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