सार: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला अब गहराता जा रहा है। योगी सरकार द्वारा बनाई गई SIT ने अपनी जांच तेज कर दी है और आरोपियों के साथ मिलकर उस पूरी घटना को रीक्रिएट किया है ताकि यह समझा जा सके कि पैसों की हेराफेरी कैसे होती थी। यह मामला सिर्फ कुछ नोटों की चोरी का नहीं है, बल्कि मंदिर की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। आइए विस्तार से जानते हैं कि SIT investigation में अब तक क्या खुलासे हुए हैं और आगे किन लोगों पर गाज गिर सकती है।
कैसे होती थी पैसों की हेराफेरी?
राम मंदिर के चढ़ावे में हुई चोरी की जांच के लिए SIT (Special Investigation Team) ने सबसे पहले उन कर्मचारियों पर शिकंजा कसा है, जिनसे पिछले दिनों कैश बरामद हुआ था। SIT ने इन चारों कर्मचारियों से पहले अलग-अलग और फिर एक साथ आमने-सामने बिठाकर पूछताछ की।
सबसे अहम बात यह रही कि टीम ने इन कर्मचारियों के सामने पूरी घटना का 'सीन रीक्रिएट' किया। इसका मकसद यह समझना था कि जब चढ़ावे की गिनती होती थी, तो उस दौरान कैसे चालाकी से पैसों की हेराफेरी करके उन्हें बाहर निकाला जाता था।
आपको बता दें कि इस मामले को सबसे पहले समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उठाया था। मामला तूल पकड़ने के बाद यूपी सरकार ने शनिवार को तीन सदस्यों वाली SIT का गठन किया। टीम को 7 दिन के अंदर अपनी शुरुआती रिपोर्ट देनी है और जांच पूरी करने के लिए 15 दिन का समय मिला है। सोमवार को अयोध्या पहुंचते ही SIT ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से पूरी प्रक्रिया की जानकारी ली।
SBI के कर्मचारी और ट्रस्ट भी रडार पर
जांच की आंच अब बैंक कर्मचारियों तक भी पहुंच गई है। SIT ने SBI (State Bank of India) के दो कर्मचारियों से पूछताछ की है। दरअसल, बैंक की तरफ से ही कैश गिनने वालों की लिस्ट दी गई थी। टीम ने यह समझने की कोशिश की कि गिनती के बाद पैसा बैंक तक कैसे पहुंचता था।
पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने पूछताछ में जिन बैंक कर्मचारियों का नाम लिया था, उन्हें भी बुलाया गया। हालांकि, इनमें से एक का ट्रांसफर अयोध्या से बाहर हो चुका है और दूसरे की डेस्क (डिपार्टमेंट) बदल दी गई है। अब तक कुल 6 लोगों से पूछताछ हो चुकी है।
आने वाले दिनों में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों और व्यवस्था देखने वाले अन्य जिम्मेदारों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे। इसके अलावा, आउटसोर्सिंग कंपनियों के कामकाज और उनके द्वारा रखे गए कर्मचारियों के पुलिस वेरिफिकेशन की भी बारीकी से जांच होगी।
चोरी से बड़ा खतरा है सुरक्षा में चूक
सूत्रों की मानें तो SIT इस मामले को सिर्फ 'चढ़ावे की चोरी' के एंगल से नहीं देख रही है। राम मंदिर एक बेहद संवेदनशील जगह है। अगर चंद रुपयों के लालच में गलत लोग इतनी आसानी से इतनी महत्वपूर्ण जगहों तक पहुंच सकते हैं, तो यह भविष्य के लिए एक बहुत बड़ा सिक्योरिटी रिस्क है। ऐसे लालची लोगों का फायदा उठाकर कोई भी बाहरी अराजक तत्व मंदिर परिसर में किसी बड़ी घटना को अंजाम दे सकता है। इसलिए, जांच का दायरा अब पूरी व्यवस्था और उसकी कमियों को सुधारने तक बढ़ा दिया गया है।
मंदिर में ही बना SIT का अस्थाई ऑफिस
जांच को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए SIT ने राम मंदिर परिसर के अंदर ही मौजूद ग्रीनहाउस को अपना अस्थाई ऑफिस बना लिया है। फिलहाल यहां फर्नीचर और बाकी जरूरत का सामान सेट किया जा रहा है। अब अधिकारी यहीं बैठकर जांच की पूरी प्रक्रिया को मॉनिटर करेंगे। प्राइवेसी बनाए रखने के लिए यहां भरोसेमंद टेक्निकल स्टाफ, वीडियोग्राफर और कंप्यूटर ऑपरेटर की भी नियुक्ति की जा रही है, ताकि जांच से जुड़ी कोई भी जानकारी बाहर लीक न हो।

