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Gaurav Bhatia का बड़ा एक्शन: CJP नेताओं पर ठोका 2 करोड़ का Defamation Case, जानें पूरा AI विवाद

सार: भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया ने सोशल मीडिया पर फेक न्यूज़ फैलाने वालों पर सख्त एक्शन लिया है। उन्होंने अपनी छवि खराब करने के आरोप में ‘CJP’ संगठन के नेताओं पर 2 करोड़ रुपये का मानहानि केस दर्ज कराया है। यह पूरा विवाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक AI-जेनरेटेड फर्जी पोस्टर शेयर करने से शुरू हुआ था। दिल्ली हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के बीच, आइए जानते हैं कि आखिर इस विवाद की असली वजह क्या है और इस पर गौरव भाटिया का क्या कहना है।

गौरव भाटिया ने CJP संगठन से जुड़े तीन नेताओं- सौरव दास, अभिजीत दिपके और आशुतोष रांका के खिलाफ यह बड़ा कानूनी कदम उठाया है। इन तीनों पर आरोप है कि इन्होंने सोशल मीडिया पर गौरव भाटिया की AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से बनाई गई फर्जी तस्वीरें और झूठे बयान पोस्ट किए। इस मामले की सुनवाई आज (बुधवार) को दिल्ली हाई कोर्ट में होने जा रही है।

कैसे शुरू हुआ फर्जी AI पोस्टर विवाद?

इस पूरे विवाद की जड़ सौरव दास का एक सोशल मीडिया (X) पोस्ट है। सौरव ने एक फर्जी ग्राफिक पोस्टर शेयर किया था, जिसे बिल्कुल किसी न्यूज़ संस्थान के लेआउट जैसा बनाया गया था। इस पोस्टर में गौरव भाटिया की फोटो के साथ एक झूठा बयान छापा गया था।

बयान में दावा किया गया था कि भाटिया ने हिंदूवादी इंफ्लूएंसर स्वतंत्र भारद्वाज को ‘दिमागी नक्सल’ और ‘जातिवादी’ कहा है। साथ ही यह भी लिखा था कि उस इंफ्लूएंसर का बीजेपी सरकार से कोई लेना-देना नहीं है। गौरव भाटिया ने तुरंत इस दावे को खारिज करते हुए इसे AI का इस्तेमाल कर रचा गया एक झूठा षड्यंत्र बताया।

24 घंटे का अल्टीमेटम और फिर एक्शन

फर्जी पोस्ट वायरल होने के बाद गौरव भाटिया ने सौरव दास को 24 घंटे की मोहलत दी थी। उन्होंने चेतावनी दी थी कि समय सीमा के भीतर पोस्ट को डिलीट किया जाए और बिना किसी शर्त के पब्लिक प्लेटफॉर्म पर माफी मांगी जाए।

कानूनी कार्रवाई के डर से सौरव दास ने महज 83 मिनट में वह विवादित पोस्ट डिलीट कर दी, लेकिन सबके सामने माफी मांगने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद, भाटिया ने झूठा प्रोपेगैंडा और नफरत फैलाने के खिलाफ 2 करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया। उनका साफ कहना है कि फेक न्यूज़ फैलाकर सिर्फ पोस्ट डिलीट कर देने से कोई अपनी कानूनी जवाबदेही से बच नहीं सकता।

"अदालत में झूठ के ताबूत में आखिरी कील ठोकी जाएगी"

लीगल एक्शन की जानकारी देते हुए गौरव भाटिया ने बहुत ही कड़े शब्दों में अपनी बात रखी। उन्होंने साफ कर दिया कि यह मामला अब सोशल मीडिया की बहस तक सीमित नहीं रहेगा।

उन्होंने अपने बयान में लिखा, "जब आरोप अपनी हदें पार करते हैं, तब कानून अपना काम करता है। अब न तो कोई सोशल मीडिया ट्रायल होगा और न ही बयानों की लड़ाई। सिर्फ तथ्य, सबूत और कानून का राज चलेगा। अदालत में हर ठोस दलील गूंजेगी और झूठ के ताबूत में आखिरी कील ठोकी जाएगी।"

अब सभी की नज़रें दिल्ली हाई कोर्ट पर टिकी हैं कि कोर्ट फेक न्यूज़ और AI के इस दुरुपयोग मामले में क्या फैसला सुनाता है।

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