सार: पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का सीधा और जानलेवा असर भारतीय नागरिकों पर पड़ रहा है। मार्च 2026 से शुरू हुए इस घमासान में अब तक 13 भारतीयों की मौत हो चुकी है, जबकि तीन अभी भी लापता हैं। होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों, कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और डोनाल्ड ट्रंप की 20% टैक्स वाली नई पॉलिसी ने दुनिया भर की टेंशन बढ़ा दी है। इस संकट के बीच भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए कूटनीतिक स्तर पर कड़े कदम उठा रहा है।
होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमला
हाल ही में होर्मुज खाड़ी में यूएई (UAE) के दो वाणिज्यिक जहाजों - 'अल बहिया' और 'मोम्बासा' पर ईरान ने हमला किया। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इन जहाजों पर कुल 30 भारतीय नाविक सवार थे। 'अल बहिया' (12 नाविक) पर हुए हमले में एक भारतीय की मौत हो गई और एक अन्य घायल हुआ है। वहीं 'मोम्बासा' (18 नाविक) पर नौ भारतीय घायल हुए हैं, जिनमें दो की हालत काफी नाजुक है।
इस घटना के तुरंत बाद भारत ने नई दिल्ली में मौजूद ईरान के उप-राजदूत (DCM) को तलब कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। उधर, जहाजों पर हुए इस हमले के बाद अमेरिका ने ईरान पर ताबड़तोड़ जवाबी कार्रवाई की है और यूएई ने भी ईरान को सख्त चेतावनी दी है।
पुणे के हेरंब करमरकर का आखिरी मैसेज
ईरान के एक अन्य हमले में ओमान तट के पास साइप्रस के झंडे वाले मर्चेंट जहाज 'GFX Galaxy' को निशाना बनाया गया। इस दर्दनाक हादसे में पुणे के रहने वाले मरीन इंजीनियर हेरंब करमरकर की जान चली गई। मौत से ठीक पहले उन्होंने अपने परिवार को अपना आखिरी मैसेज भेजा था, जिसमें लिखा था: "जहाज ने होर्मुज को सुरक्षित तरीके से पार कर लिया है।"
बुधवार को परिवार ने उनकी मौत की पुष्टि की। हेरंब के ससुर ने सरकार से उनका शव सुरक्षित वापस भारत लाने की गुहार लगाई है। इस कमर्शियल जहाज पर कई भारतीय सवार थे, जिनमें से 10 को रेस्क्यू कर लिया गया है, लेकिन एक अभी भी लापता है। ओमान स्थित भारतीय दूतावास लगातार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' के जरिए अपडेट दे रहा है और हर संभव मदद पहुंचा रहा है।
मंडरा रहा है फुल-स्केल वॉर का खतरा
खाड़ी में हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि ईरान ने जार्डन, बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी हमले का दावा किया है। इससे दोनों देशों के बीच हुआ नाजुक युद्धविराम खतरे में पड़ गया है और फिर से युद्ध शुरू होने की आशंका बढ़ गई है। इस जियोपॉलिटिकल टेंशन का सीधा असर इकॉनमी पर पड़ा है; कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें 9 प्रतिशत उछलकर 86 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं।
ट्रंप का 20% टैक्स फरमान और दुनिया का विरोध
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नेवी की नाकेबंदी दोबारा लागू करने का ऐलान किया है। उन्होंने कांग्रेस को औपचारिक जानकारी देते हुए कहा कि अमेरिका वहां से गुजरने वाले जहाजों को सुरक्षा देगा, लेकिन इसके एवज में 20 प्रतिशत टैक्स वसूलेगा।
भारत ने ट्रंप के इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा ने तो ट्रंप के इस कदम को सीधे तौर पर "डकैती" बताया है।
आपको बता दें कि पिछले 48 घंटों में ही तीन भारतीयों की जान जा चुकी है। इससे पहले जून में भी एक अमेरिकी एयरस्ट्राइक की चपेट में आने से एक कमर्शियल जहाज पर 3 भारतीयों की मौत हुई थी। तब भारत ने अमेरिकी अधिकारियों को तलब किया था और पीएम नरेंद्र मोदी ने फ्रांस में ट्रंप से मुलाकात के दौरान भी यह मुद्दा उठाया था।
फारस की खाड़ी में फंसे भारतीय जहाज
लगातार बिगड़ते हालातों के बीच, फारस की खाड़ी में इस वक्त भारत के झंडे वाले 7 जहाज फंसे हुए हैं, जिन पर कुल 148 भारतीय नाविक सवार हैं। एक सरकारी अधिकारी के अनुसार, इनमें से पांच जहाज कमर्शियल गतिविधियों में लगे हैं। सुरक्षा स्थिति को देखते हुए वे फिलहाल खाड़ी से बाहर निकलने का रिस्क नहीं ले रहे हैं। तनाव कम होने के बाद ही इनके सुरक्षित सफर पर फैसला लिया जाएगा।
भारत सरकार का सख्त रुख
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने होर्मुज खाड़ी जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में कमर्शियल जहाजों पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की है। भारत ने सभी पक्षों से तत्काल हिंसा रोककर कूटनीति (Diplomacy) और बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की है। बीते कुछ हफ्तों में पीएम मोदी खुद व्यावसायिक जहाजों और सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने के मुद्दे को कई बार मजबूती से उठा चुके हैं। यूएई स्थित भारतीय दूतावास भी प्रभावित नाविकों और उनके परिवारों के संपर्क में है और उन्हें हर मुमकिन सहायता दे रहा है।


