सार: बिहार की चर्चित 'बांकीपुर' विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव ने अब एक बेहद दिलचस्प मोड़ ले लिया है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने इस हाई-प्रोफाइल सीट से खुद चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। यह सीट हाल ही में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई है। पिछले तीन दशकों से बांकीपुर बीजेपी का अजेय गढ़ रहा है, लेकिन यहाँ वोटिंग का ट्रेंड हमेशा सुस्त (करीब 40%) ही रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशांत किशोर की एंट्री से घर बैठे 60% वोटर बूथ तक पहुंचेंगे और बीजेपी के इस किले में कोई सेंध लगेगी? वहीं, पशुपति पारस की RLJP ने भी यहाँ से अपना कैंडिडेट उतारने की घोषणा कर दी है, जिससे यह चुनावी दंगल और भी रोमांचक हो गया है।
पीके की एंट्री से हाई-प्रोफाइल हुआ बांकीपुर का दंगल
जन सुराज पार्टी के कोर कमेटी की बैठक के बाद, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रशांत किशोर की उम्मीदवारी का ऑफिशियल ऐलान कर दिया। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक, आज 6 जुलाई को उपचुनाव का गजट नोटिफिकेशन जारी हो रहा है। इसके लिए 30 जुलाई को वोटिंग होगी और 3 अगस्त को नतीजे सबके सामने होंगे। प्रशांत किशोर के मैदान में उतरने से यह उपचुनाव सिर्फ बांकीपुर का नहीं, बल्कि पूरे बिहार की राजनीति का सेंटर पॉइंट बन गया है।
सीएम सम्राट चौधरी पर पीके का सीधा निशाना
अपनी उम्मीदवारी की घोषणा के तुरंत बाद प्रशांत किशोर ने आक्रामक रुख अपनाते हुए सीधे बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर हमला बोला। उन्होंने सीएम को 'बैकडोर' से आया हुआ नेता बताते हुए कहा कि सम्राट चौधरी के चाल, चरित्र और चेहरे पर बिहार की जनता को कोई भरोसा नहीं है। पीके ने स्पष्ट किया कि बांकीपुर के प्रबुद्ध मतदाताओं के कंधों पर अब यह जिम्मेदारी है कि वे एक बेहतर विकल्प चुनकर मौजूदा सरकार को कड़ा संदेश दें।
क्या टूटेगा बीजेपी का 30 सालों का रिकॉर्ड?
बांकीपुर सीट को बीजेपी का सबसे सेफ जोन माना जाता है। पिछले तीन विधानसभा चुनावों (2015, 2020 और 2025) का रिकॉर्ड देखें तो नितिन नबीन को यहाँ लगातार 59% से 62% के बीच वोट मिलते रहे हैं। 2025 के चुनाव में तो उन्होंने 51 हज़ार से ज्यादा वोटों के मार्जिन से जीत दर्ज की थी।
लेकिन इस सीट की एक दूसरी सच्चाई भी है- यहाँ की 'उदासीनता'। पिछले तीनों चुनावों में बांकीपुर में औसतन सिर्फ 40% के आसपास ही वोटिंग हुई है। यानी लगभग 60% वोटर वोट डालने ही नहीं जाते। प्रशांत किशोर की रणनीति इन्हीं साइलेंट और निराश वोटरों को टारगेट करने की है। उनका दावा है कि बांकीपुर की जनता, जो बीजेपी और आरजेडी दोनों से ऊब चुकी है, अब जन सुराज के रूप में एक नया और मजबूत विकल्प चाहती है।
जन सुराज के लिए साख का सवाल
नवंबर 2025 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज पार्टी का प्रदर्शन बहुत ही निराशाजनक रहा था। 243 में से 238 सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद पार्टी का खाता तक नहीं खुल पाया था। उस समय पीके खुद चुनाव नहीं लड़े थे, जिसे हार की एक बड़ी वजह माना गया। लेकिन अब उन्होंने बांकीपुर से खुद को मैदान में उतारकर एक बड़ा रिस्क लिया है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को भरोसा दिलाया है कि आने वाले 10 सालों तक बिहार में बदलाव ही उनका इकलौता मकसद है और बांकीपुर की जीत इस बदलाव के आंदोलन में नई जान फूंक देगी।
RLJP ने भी बढ़ाई टेंशन
इस चुनावी लड़ाई में अब सिर्फ जन सुराज और एनडीए ही नहीं हैं। पशुपति पारस की अगुवाई वाली राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (RLJP) ने भी बांकीपुर सीट से अपना कैंडिडेट उतारने का ऐलान कर दिया है। पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रिंस पासवान ने इसका खुलासा करते हुए मौजूदा राज्य सरकार को दलितों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर जमकर घेरा। 2021 में एलजेपी में हुई टूट के बाद से ही पशुपति पारस खुद को और अपनी पार्टी को राजनीतिक रूप से दोबारा स्थापित करने की जद्दोजहद में लगे हैं। ऐसे में बांकीपुर उपचुनाव उनके लिए एक बड़ा मौका साबित हो सकता है।

