सार: 1990 बैच की तेजतर्रार IPS ऑफिसर और 'हंटर वाली मैडम' के नाम से मशहूर शोभा ओहटकर आज, 30 जून को रिटायर हो रही हैं। फिलहाल वे बिहार होमगार्ड और फायर सर्विस की DG पद पर तैनात थीं। अपने करियर के दौरान बिहार और झारखंड के 6 जिलों में बतौर SP उन्होंने अपराधियों, कोयला माफियाओं और मनचलों के छक्के छुड़ा दिए थे। आइए जानते हैं उनकी बुलेट वाली एंट्री से लेकर गिनीज बुक के दावे और हालिया विवादों तक की पूरी कहानी, जिसने उन्हें हमेशा सुर्खियों में रखा।
बिहार पुलिस महकमे में अपराधियों के लिए खौफ का दूसरा नाम रहीं IPS Shobha Ohatker आज रिटायर हो रही हैं। पटना के बिहटा स्थित केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थान में उनके सम्मान में एक शानदार विदाई समारोह रखा गया है। 1990 बैच की इस लेडी सिंघम ने अपने काम के तरीके और कड़क मिजाज से पुलिस डिपार्टमेंट में अपनी एक अलग ही पहचान बनाई।
22 की उम्र में बनीं IPS, अपराधियों में था बुलेट का खौफ
शोभा ओहटकर का जन्म पुणे में हुआ था। उन्होंने हैदराबाद से पॉलिटिकल साइंस में MA किया और सिविल सर्विस एग्जाम पास कर महज 22 साल की उम्र में IPS बन गईं। उनके पिता बलराम अहोटकर हैदराबाद में एक्साइज कमिश्नर थे और शोभा अपनी इस कामयाबी का पूरा क्रेडिट अपने पिता को ही देती हैं।
उनकी पहली पोस्टिंग 1992 में पटना सिटी ASP के रूप में हुई थी। उस दौर में बिहार में मर्डर, लूट, किडनैपिंग और रंगदारी जैसे क्राइम अपने चरम पर थे। बताया जाता है कि उस समय जब यह युवा महिला IPS ऑफिसर अपनी बुलेट पर निकलती थीं, तो अपराधियों के पसीने छूट जाते थे। वे जिस भी जिले में पोस्टेड रहीं, वहां क्राइम का ग्राफ काफी हद तक गिर गया।
क्यों पड़ा 'हंटर वाली मैडम' नाम?
शोभा ओहटकर को उनके सख्त रवैये के कारण 'हंटर वाली मैडम' कहा जाने लगा। बात उस वक्त की है जब उनकी पोस्टिंग देवघर में थी। वहां बाबा बैद्यनाथ धाम मंदिर के आसपास और शहर में महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की कई शिकायतें सामने आईं। शोभा ने इस पर तुरंत कड़ा एक्शन लिया। वे मनचलों और अपराधियों को पकड़कर बीच सड़क पर हंटर से पीटती थीं। उनके इस अंदाज ने महिलाओं के अंदर सुरक्षा का भरोसा जगाया और अपराधियों में दहशत पैदा कर दी।
माफियाओं पर एक्शन और 'Guinness Book' का दावा
1992 से लेकर 2000 तक शोभा बिहार के 6 जिलों - पटना, दरभंगा, हजारीबाग, छपरा, वैशाली और देवघर में SP रहीं।
- हजारीबाग: यहाँ पोस्टिंग के दौरान उन्होंने कोयला माफियाओं की कमर तोड़ दी। करोड़ों का कोयला जब्त किया गया और 40 से ज्यादा बड़े तस्करों को जेल की हवा खानी पड़ी। इस बड़ी कार्रवाई की चर्चा पूरे देश में हुई थी और कहा जाता है कि इस कारनामे के लिए उनका नाम गिनीज बुक में भी दर्ज हुआ (हालांकि आधिकारिक तौर पर इसे प्रमाणित करने में सावधानी बरती जाती है)।
- दरभंगा और वैशाली: 1998 में दरभंगा में किडनैपिंग की वारदातों को उन्होंने अपनी बेहतरीन इन्वेस्टिगेशन से कंट्रोल किया। वहीं वैशाली में रहते हुए उन्होंने राघोपुर के दियारा इलाके में एक्टिव 16 से 17 बड़े क्रिमिनल गैंग्स का पूरी तरह सफाया कर दिया।
महाराष्ट्र डेपुटेशन और बिहार वापसी
साल 2000 में जब बिहार और झारखंड अलग हुए, तो वे सेंट्रल डेपुटेशन पर अपने होम स्टेट महाराष्ट्र चली गईं। 20 सालों तक वहां सर्विस देने के बाद 2020 में वे वापस बिहार लौटीं और उन्हें प्रमोट करके DG बनाया गया। निजी जिंदगी की बात करें तो उनके एक बेटा और एक बेटी हैं, और वे अपने पति से काफी पहले तलाक ले चुकी हैं।
IG विकास वैभव के साथ विवाद
अपने बेबाक अंदाज के चलते वे कई बार विवादों में भी रहीं। 2023 में IG विकास वैभव के साथ उनका विवाद काफी नेशनल मीडिया में छाया रहा। विकास वैभव ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया था कि DG शोभा ओहटकर उन्हें गालियां देती हैं और मेंटली टॉर्चर करती हैं। हालांकि, शोभा ने इन सभी बातों को बकवास बताते हुए इसे अनुशासनहीनता और काम में रुकावट डालने का मामला बताया था।
इन विवादों से अलग हटकर देखें तो बिहार में फायर सर्विस और होमगार्ड डिपार्टमेंट को मॉडर्न बनाने और उसमें सुधार लाने का बहुत बड़ा क्रेडिट IPS शोभा ओहटकर को ही जाता है। बिहार पुलिस में उनकी कमी यकीनन महसूस की जाएगी।

